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December 16, 2025

हिमाचल-तिब्बत बॉर्डर से शुरू होगा भारत चीन के बीच व्यापार, फिर बिकेगा चाइनीज़ माल

सुरक्षा मानकों में नहीं दी जाएगी कोई ढील

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Kinnaur News

किन्नौर। हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिले में स्थित शिपकी-ला दर्रे के जरिए भारत और चीन के बीच सीमा व्यापार दोबारा शुरू होने जा रहा है। केंद्र सरकार से मंजूरी मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। करीब छह साल बाद शुरू होने वाले इस व्यापार के तहत अधिसूचित वस्तुओं के आयात-निर्यात की अनुमति होगी। व्यापार सत्र के दौरान शिपकी-ला के रास्ते एक बार फिर चीनी उत्पाद भारतीय बाजारों तक पहुंचेंगे।

जून 2026 से प्रस्तावित व्यापार हो सकता है शुरू

किन्नौर के उपायुक्त एवं सह-व्यापार प्राधिकरण डॉ. अमित कुमार शर्मा ने बताया कि, इस संबंध में सभी संबंधित विभागों और हितधारकों के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की गई है। बैठक में जून 2026 से प्रस्तावित व्यापार शुरू करने से पहले आवश्यक व्यवस्थाओं और संसाधनों का आकलन किया गया। शिपकी-ला और नमगिया क्षेत्र में सड़क संपर्क, सुरक्षा प्रबंध, सीमा शुल्क से जुड़ी तैयारियां, स्वास्थ्य सुविधाएं, आपात सेवाएं और व्यापारियों के पंजीकरण जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा हुई है।

 

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सुरक्षा मानकों में नहीं दी जाएगी कोई ढील

सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि व्यापार मार्ग की निगरानी भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और स्थानीय पुलिस संयुक्त रूप से करेगी। सीमा क्षेत्र की संवेदनशीलता को देखते हुए सुरक्षा मानकों में कोई ढील नहीं दी जाएगी। उपायुक्त ने बताया कि कोविड-19 महामारी के कारण यह सीमा व्यापार पिछले करीब छह वर्षों से बंद था, जिसे अब दोबारा शुरू करने की तैयारी की जा रही है।

यह होगी पंजीकरण की प्रक्रिया

व्यापारियों के पंजीकरण की प्रक्रिया पूह तहसीलदार के माध्यम से की जाएगी। केवल वही व्यापारी व्यापार कर सकेंगे जिन्हें आधिकारिक रूप से अनुमति दी जाएगी। पंजीकरण के लिए पहचान पत्र, निवास प्रमाण पत्र, पूर्व व्यापार का रिकॉर्ड (यदि उपलब्ध हो) और पासपोर्ट साइज फोटो अनिवार्य होंगे।

 

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इसके अलावा, भारत सरकार द्वारा अधिसूचित वस्तुओं का ही आयात और निर्यात किया जा सकेगा। सीमा शुल्क विभाग की ओर से शिपकी-ला पर आवश्यक स्टाफ की तैनाती भी की जाएगी, ताकि व्यापारिक गतिविधियां सुचारू रूप से संचालित हो सकें।

ट्रम्प टैरिफ मानी जा रही वजह

इस बीच यह चर्चा भी तेज है कि भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद के चलते बदले वैश्विक समीकरणों का असर भारत–चीन संबंधों पर पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाए जाने के बाद भारत और चीन के बीच व्यापारिक नजदीकियां बढ़ने की अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि शिपकी-ला व्यापार को मंजूरी दिए जाने को लेकर इस पहलू की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।

 

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78 वर्षों बाद खुला शिपकी-ला दर्रा

विदित हो कि, शिपकी-ला दर्रा हाल ही में 10 जून 2025 को, लगभग 78 वर्षों बाद, पर्यटकों के लिए भी खोला गया था। यह दर्रा तिब्बत क्षेत्र से सटा हुआ है, जहां वर्तमान में चीन का नियंत्रण है। यहां भारतीय सेना की तैनाती रहती है और पर्यटकों को विशेष अनुमति के बाद ही जाने की इजाजत दी जाती है, जबकि रात्रि ठहराव की अनुमति नहीं है। इसी मार्ग से मानसरोवर यात्रा का पारंपरिक रास्ता भी जुड़ा है, हालांकि इसके लिए चीन की अनुमति आवश्यक होती है। अब व्यापार की बहाली से किन्नौर और सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

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