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November 15, 2025
हिमाचल के पंचायत चुनाव की तारीख पर सस्पेंस बरकरार, अप्रैल - मई तक टलने के आसार
दिसंबर के अंत तक बर्फ से कट जाएंगे प्रदेश के कई जिला
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शिमला। हिमाचल के पंचायत चुनाव इस बार सिर्फ चुनाव नहीं, बल्कि एक सस्पेंस थ्रिलर बन गए हैं। तारीख पर धुंध छाई है, मौसम चुनौती दे रहा है और प्रशासनिक काउंटडाउन थम-सा गया है। जैसे-जैसे समय बीत रहा है, अप्रैल- मई की संभावना और मजबूत होती जा रही है।
हिमाचल प्रदेश में पंचायत और शहरी निकाय चुनाव 27 जनवरी तक होने थे, लेकिन अब ऐसा लग रहा है कि चुनाव समय पर नहीं हो पाएंगे। वजह साफ है- दिसंबर के बाद पहाड़ी जिलों में भारी बर्फबारी शुरू हो जाती है और सड़कें बंद हो जाती हैं। ऐसे में चुनाव करवाना बेहद मुश्किल हो जाता है। इसलिए इस बार अप्रैल-मई में चुनाव करवाने की उम्मीद ज्यादा है।
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राज्य निर्वाचन आयोग ने चुनाव की तैयारियां लगभग पूरी कर ली हैं। मतदाता सूचियों का काम भी अंतिम चरण में है। लेकिन पंचायत सीमाओं के नए प्रस्तावों ने मुश्किल बढ़ा दी है। अगर सीमाएं बदलीं तो मतदाता सूची को फिर से दोबारा तैयार करना पड़ेगा।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हाल ही में सभी जिला उपायुक्तों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए चुनावी तैयारी की जानकारी ली। अब राज्य निर्वाचन आयुक्त सभी बड़े अधिकारियों के साथ बैठक कर आगे का रास्ता तय करेंगे।
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चुनाव की अधिसूचना जारी होने के बाद मतदान तक कम से कम 28 दिन का समय जरूरी होता है। अभी आरक्षण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है। ऐसे में दिसंबर में चुनाव करवाना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है।
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किन्नौर, लाहुल स्पीति, भरमौर-पांगी और बड़ा भंगाल जैसे इलाकों में जनवरी के बाद बर्फबारी से सड़कें बंद हो जाती हैं। चुनाव दलों और सुरक्षा बलों का पहुंचना मुश्किल हो जाता है। इसलिए जनवरी में चुनाव करना जोखिम भरा साबित हो सकता है।
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2021 में कोविड के दौरान भी यही सुझाव दिया गया था कि बर्फबारी वाले मौसम में चुनाव न करवा कर अप्रैलदृमई में शिफ्ट किया जाए। स्पीति में तो पहले से ही पंचायत चुनाव गर्मियों में होते हैं।
राज्य निर्वाचन आयुक्त अनिल खाची का कहना है कि चुनाव की प्रक्रिया तो चल रही है, लेकिन पंचायत सीमाओं में बदलाव हुआ तो मतदाता सूची भी बदलनी पड़ेगी। सभी अधिकारियों की बैठक के बाद ही चुनाव की तारीख पर अंतिम मुहर लगेगी।