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August 22, 2025
सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: अब होमगार्ड्स को भी पुलिस कांस्टेबल के बराबर मिलेगा भत्ता
सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की प्रदेश सरकार की अपील
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के करीब पांच हजार होमगार्ड जवानों के लिए राहत भरी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने होमगार्ड जवानों के पक्ष में ऐतिहासिक निर्णय दिया है। जिससे प्रदेश के हजारों होमगार्डस जवानों को राहत मिलेगी। दरअसल देश की सर्वोच्च अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसले में समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत को दोहराते हुए होमगार्ड्स को बड़ी राहत दी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि होमगार्ड जवानों को भी पुलिस कांस्टेबल के न्यूनतम वेतन के बराबर ही ड्यूटी भत्ता मिलना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा है कि होमगार्ड्स को भी वही ड्यूटी भत्ता मिलना चाहिए जो पुलिस कांस्टेबल को मिलता है, जिसमें बेसिक पे, ग्रेड पे, महंगाई भत्ता और वॉशिंग अलाउंस शामिल हैं। यह फैसला गृह रक्षक होमगार्ड्स वेलफेयर एसोसिएशन बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य (2015) 6 एससीसी 247 मामले पर आधारित है, जिसे अब एक मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।
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राज्य सरकार ने इस आदेश को चुनौती देते हुए डायरी नंबर 36000/2025 के तहत पुनर्विचार की याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल की थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए अंतरिम आदेश को बरकरार रखा। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता और उन्हें संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 21 (जीवन और गरिमा का अधिकार) के तहत पूर्ण न्याय मिलना चाहिए।
इसी पृष्ठभूमि में उत्तर प्रदेश के लगभग 45,000 पीआरडी जवानों के हित में भी एक और महत्वपूर्ण याचिका दायर की गई, जिसमें वकील विनोद शर्मा (एओआर) और गौरव कुमार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी डायरी नंबर 41057/2025 के तहत "संजय कुमार एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य" शीर्षक से याचिका दायर की। इस याचिका में मांग की गई थी कि पीआरडी जवानों को भी समान कार्य के लिए समान वेतन का लाभ दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की आपत्ति को दरकिनार करते हुए याचिकाकर्ताओं को यह स्वतंत्रता दी कि वे इलाहाबाद उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच के समक्ष जाकर यह लाभ सभी 45,000 पीआरडी जवानों तक विस्तारित करवा सकते हैं।
यह फैसला न केवल हिमाचल के होमगार्ड्स के लिए बल्कि देशभर के अस्थायी, अनुबंधित एवं मानदेय पर कार्यरत सुरक्षाकर्मियों के लिए एक मिसाल बन सकता है। वर्षों से उपेक्षित इन जवानों को अब न्याय, सम्मान और आर्थिक सुरक्षा की उम्मीद बंधी है।
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कई वर्षों से होमगार्ड्स न्यूनतम सुविधाओं और कम मानदेय पर काम कर रहे थे, जबकि उनसे वही जिम्मेदारियां निभाई जाती रहीं जो नियमित पुलिस बल निभाता है। सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय इन कर्मियों को उनके कार्य के अनुरूप सम्मानजनक पारिश्रमिक दिलाने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।