#विविध
December 26, 2025
सुक्खू सरकार IAS राखिल पर हुई मेहरबान, रिटायरमेंट से एक माह पहले HPPSC में मिली 6 साल की तैनाती
तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी नियुक्ति
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी राखिल काहलो को सेवानिवृत्ति से ठीक एक माह पहले बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। राज्य सरकार ने उन्हें हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग यानी HPPSC का सदस्य नियुक्त किया है। इस संबंध में मुख्य सचिव संजय गुप्ता की ओर से अधिसूचना जारी कर दी गई है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू मानी जाएगी।
वर्तमान में राखिल काहलो राज्य सरकार में जल शक्ति विभाग में सचिव के पद पर सेवाएं दे रही हैं। नई नियुक्ति के तहत उन्हें आगामी छह वर्षों के लिए HPPSC का सदस्य बनाया गया है। गौरतलब है कि राखिल काहलो 31 जनवरी 2026 को सेवानिवृत्त होने वाली थीं, लेकिन रिटायरमेंट से पहले ही उन्हें लोक सेवा आयोग जैसी संवैधानिक संस्था में अहम भूमिका सौंपी गई है।
यह भी पढ़ें : MP अनुराग बोले : विदेश जाकर भारत को कोसते हैं राहुल गांधी, पूर्व CM शांता से भी की राजनीतिक चर्चा
2008 बैच की आईएएस अधिकारी राखिल काहलो इससे पहले प्रशासनिक क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुकी हैं। वे मंडी की डिविजनल कमिश्नर, आयुष विभाग की सचिव, हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड धर्मशाला की सचिव, तथा डिजिटल टेक्नोलॉजी एवं गवर्नेंस विभाग की सचिव जैसे अहम दायित्व निभा चुकी हैं। उनके लंबे प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए सरकार ने उन्हें HPPSC में जिम्मेदारी देने का निर्णय लिया है।
यह भी पढ़ें : CM सुक्खू के साथ डॉक्टरों की बैठक खत्म, हड़ताल पर फैसला बाकी- IGMC में मरीज बिना इलाज लौटे
लोक सेवा आयोग राज्य में राजपत्रित पदों के साथ-साथ कुछ अराजपत्रित पदों पर भर्ती परीक्षाओं का संचालन करता है। आयोग की भूमिका चयन परीक्षाओं के आयोजन, साक्षात्कार प्रक्रिया, भर्ती नियमों की समीक्षा और निष्पक्ष चयन सुनिश्चित करने में बेहद अहम होती है। ऐसे में राखिल काहलो की नियुक्ति को आयोग के कामकाज के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह भी पढ़ें : PM मोदी तक पहुंचा IGMC डॉक्टर मामला- आज CM के फैसले पर टिकी निगाहें, हड़ताल की चेतावनी
हालांकि, रिटायरमेंट से ठीक पहले इस नियुक्ति को लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्ष इसे सरकार की ‘मेहरबानी’ बता रहा है, जबकि सरकार का पक्ष है कि अनुभवी अधिकारी को संवैधानिक संस्था में जिम्मेदारी देना प्रशासनिक दृष्टि से उचित कदम है। आने वाले समय में HPPSC में राखिल काहलो की भूमिका पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।