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March 28, 2026

सुक्खू सरकार 1518 पंचायत चौकीदारों को नहीं करेगी रेगुलर! चतुर्थ श्रेणी कर्मियों को भी झटका- जानें

पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने स्पष्ट की स्थिति

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Panchayat Chowkidar

शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चौकीदारों से जुड़ा एक बड़ा अपडेट सामने आया है, जिसने हजारों कर्मचारियों की उम्मीदों को झटका दिया है। विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वर्तमान में दैनिक वेतनभोगी बनाए गए पंचायत चौकीदारों को नियमित करने की कोई योजना नहीं है।

पंचायती राज मंत्री ने स्पष्ट की स्थिति

दरअसल, प्रश्नकाल के दौरान भाजपा व कांग्रेस के कुछ विधायकों द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि जिन चौकीदारों ने 31 अगस्त 2022 तक लगातार 12 साल की सेवा पूरी कर ली थी, उन्हें सरकार ने अधिसूचना के तहत दैनिक वेतनभोगी का दर्जा दे दिया है। लेकिन अब उन्हें नियमित करने का कोई प्रस्ताव सरकार के विचाराधीन नहीं है।

 

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12 साल की सेवा बाद बने दैनिक वेतनभोगी

प्रदेश में कुल 3773 ग्राम पंचायतों के तहत 2912 पंचायत चौकीदार कार्यरत हैं। इनमें से 1518 चौकीदारों को 12 साल की सेवा पूरी करने के बाद दैनिक वेतनभोगी बनाया गया है। जिला स्तर पर आंकड़ों पर नजर डालें तो कांगड़ा में सबसे अधिक 282 चौकीदारों को यह लाभ मिला है, जबकि लाहौल-स्पीति में यह संख्या सबसे कम, केवल 3 है।

जिलावार आँकड़े

  • बिलासपुर: 183 पंचायतें, 140 चौकीदार, 97 बने दैनिक वेतनभोगी
  • चंबा: 320 पंचायतें, 252 चौकीदार, 147 को लाभ
  • हमीरपुर: 243 पंचायतें, 208 चौकीदार, 93 बने दैनिक वेतनभोगी
  • कांगड़ा: 847 पंचायतें, 669 चौकीदार, 282 को लाभ
  • किन्नौर: 80 पंचायतें, 63 चौकीदार, 32 को लाभ
  • कुल्लू: 246 पंचायतें, 181 चौकीदार, 114 बने दैनिक वेतनभोगी
  • लाहौल-स्पीति: 48 पंचायतें, 38 चौकीदार, 3 को लाभ

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  • मंडी- 579 पंचायतें, 408 चौकीदार, 216 बने दैनिक वेतनभोगी
  • शिमला- 446 पंचायतें, 341 चौकीदार, 241 को लाभ
  • सिरमौर- 273 पंचायतें, 208 चौकीदार, 121 बने दैनिक वेतनभोगी
  • सोलन- 257 पंचायतें, 197 चौकीदार, 96 को लाभ
  • ऊना- 251 पंचायतें, 207 चौकीदार, 76 बने दैनिक वेतनभोगी

नियमित होने की उम्मीद नहीं दिख रही

जिलावार स्थिति भी इस फैसले की व्यापकता को दर्शाती है। बिलासपुर, चंबा, हमीरपुर, मंडी, शिमला, सिरमौर, सोलन और ऊना जैसे जिलों में सैकड़ों चौकीदार वर्षों से पंचायत स्तर पर सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन अब उन्हें नियमित होने की उम्मीद नहीं दिख रही।

 

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इसके अलावा सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि पंचायती राज संस्थाओं में कार्यरत अन्य अंशकालिक और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को भी नियमित करने या उनकी सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाने का कोई प्रस्ताव फिलहाल नहीं है।

फैसले को लेकर निराशा

सरकार के इस रुख से साफ है कि वह फिलहाल स्थायी नियुक्तियों के बजाय सीमित संसाधनों के भीतर ही व्यवस्था चलाने के पक्ष में है। वहीं, दूसरी ओर लंबे समय से सेवाएं दे रहे कर्मचारियों में इस फैसले को लेकर निराशा देखी जा रही है।

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