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June 28, 2026
कर्ज में डूबे किसानों के लिए CM सुक्खू का बड़ा तोहफा, ब्याज का 50 फीसदी खुद चुकाएगी सरकार
शुरू की वन.टाइम सेटलमेंट नीति के तहत कृषि ऋण ब्याज अनुदान योजना
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में आर्थिक तंगी और कृषि ऋण के बोझ तले दबे किसानों के लिए सुक्खू सरकार बड़ी राहत लेकर आई है। ऐसे किसान जो वर्षों से कर्ज की अदायगी नहीं कर पा रहे हैं और जिनकी कृषि भूमि नीलामी के खतरे का सामना कर रही है, उन्हें अब सरकार की नई योजना से बड़ी मदद मिलने वाली है। राज्य सरकार ने एक विशेष कृषि ऋण राहत योजना शुरू करने का फैसला लिया है, जिसके तहत पात्र किसानों के बकाया ब्याज का एक बड़ा हिस्सा सरकार स्वयं वहन करेगी। इस कदम को प्रदेश के हजारों किसानों के लिए संजीवनी के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उन किसानों को मिलेगा जो कृषि ऋण की अदायगी करने में असमर्थ हो चुके हैं। अनुमान है कि प्रदेशभर में छह हजार से अधिक किसान इस योजना के दायरे में आएंगे। कई किसान लंबे समय से बढ़ते ब्याज और आर्थिक संकट के कारण ऋण का भुगतान नहीं कर पा रहे थे, जिसके चलते उनकी जमीनें भी खतरे में पड़ गई थीं। अब सरकार के हस्तक्षेप से उन्हें राहत मिलने की उम्मीद जगी है।
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नई योजना के तहत किसानों को सबसे बड़ी राहत ब्याज भुगतान में मिलने जा रही है। सरकार कृषि ऋण पर बकाया ब्याज का 50 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करेगी। इससे किसानों के लिए अपने ऋण खातों को नियमित करना आसान होगा और उन पर पड़ रहा वित्तीय दबाव काफी हद तक कम हो सकेगा। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को इस योजना से बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।
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कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां किसान ऋण अदायगी न कर पाने के कारण अपनी कृषि भूमि खोने की स्थिति में पहुंच गए थे। सरकार का मानना है कि यह योजना किसानों को नीलामी जैसी परिस्थितियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। योजना लागू होने के बाद पात्र किसानों को राहत मिलेगी और वे अपनी खेती-किसानी की गतिविधियों को बिना किसी अतिरिक्त दबाव के जारी रख सकेंगे।
सरकार ने इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए करोड़ों रुपये का वित्तीय प्रावधान भी किया है। संबंधित वित्तीय संस्थानों और सहकारी बैंकों के माध्यम से पात्र किसानों की पहचान कर उन्हें योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके लिए बैंक स्तर पर विशेष प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि वास्तविक लाभार्थियों तक सहायता समय पर पहुंच सके।
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मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा है कि किसान प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और सरकार उनकी समस्याओं को लेकर गंभीर है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ती लागत और आर्थिक चुनौतियों के कारण कई किसान वित्तीय संकट से जूझ रहे हैं, इसलिए उन्हें राहत देना सरकार की प्राथमिकता है। सरकार का मानना है कि किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत किए बिना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त नहीं बनाया जा सकता।
राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए प्राकृतिक खेती को भी प्रोत्साहित कर रही है। प्राकृतिक तरीके से उगाई गई फसलों के लिए बेहतर समर्थन मूल्य और विपणन सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का दावा है कि इससे न केवल किसानों को लाभ मिलेगा बल्कि उपभोक्ताओं को भी गुणवत्तापूर्ण और रसायन मुक्त खाद्य उत्पाद उपलब्ध होंगे।
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कर्ज और बढ़ते ब्याज के बोझ से परेशान किसानों के लिए यह योजना नई उम्मीद बनकर सामने आई है। यदि योजना का लाभ समय पर किसानों तक पहुंचता है तो हजारों परिवार आर्थिक संकट से उबर सकेंगे और प्रदेश के कृषि क्षेत्र को भी नई मजबूती मिलेगी।