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June 28, 2026
हिमाचल में खुलेगा पहला कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग स्कूल, कंपनी को सुक्खू सरकार की 'हां' का इंतजार
पायलट ट्रेनिंग के साथ तैयार होगा पूरा एविएशन हब युवाओं को मिलेगा रोजगार
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ऊना। हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक नक्शे पर एक नया इतिहास छपने जा रहा है। प्रदेश के युवाओं के ऊंचे अरमानों को अब देवभूमि में ही पंख मिलने वाले हैं। प्रदेश के ऊना जिला के औद्योगिक क्षेत्र जीतपुर बेहड़ी जल्द ही देश के एक बड़े एविएशन हब के रूप में अपनी पहचान बनाने जा रहा है। दरअसल हिमाचल प्रदेश में पहला कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग स्कूल खुलने जा रहा है।
कंपनी एयरो माइल्स एविएशन प्राइवेट लिमिटेड ने शनिवार को जीतपुर बेहड़ी के आसमान में एक हैरतअंगेज और धमाकेदार मोटर ग्लाइडर शो का आयोजन कर इस महत्वाकांक्षी परियोजना का शंखनाद किया। प्रशिक्षित पायलटों द्वारा हवा में किए गए इस रोमांचक प्रदर्शन ने यह साफ संकेत दे दिया है कि हिमाचल का पहला कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग स्कूल अब ज्यादा दूर नहीं है।
वर्तमान में देश-दुनिया के भीतर कमर्शियल पायलटों और एविएशन विशेषज्ञों की मांग चरम पर है। इस बड़ी मांग को देखते हुए कंपनी ने हिमाचल सरकार के समक्ष एक मेगा इंवेस्टमेंट का प्रस्ताव रखा है। कंपनी के प्रवक्ता शिंगारा सिंह ने बताया कि यदि प्रदेश सरकार से उन्हें जीतपुर बेहड़ी में लीज पर भूमि मिल जाती है, तो वे तुरंत धरातल पर काम शुरू कर देंगे।
इस ड्रीम प्रोजेक्ट के साकार होने से सबसे बड़ा फायदा हिमाचल के युवाओं को होगा। अब तक पायलट बनने का सपना देखने वाले होनहारों को लाखों रुपये खर्च करके दूसरे राज्यों या विदेशों का रुख करना पड़ता था। लेकिन अब उन्हें अपने ही घर-आंगन में वैश्विक स्तर का प्रशिक्षण मिलेगा।
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विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना शुरू होती है तो प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। प्रशिक्षकों, तकनीकी विशेषज्ञों, इंजीनियरों, प्रशासनिक कर्मचारियों और पर्यटन क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी नए अवसर सामने आएंगे। इसके साथ ही स्थानीय कारोबार, होटल उद्योग और परिवहन क्षेत्र को भी इसका लाभ मिलने की संभावना है।
प्रस्तावित परियोजना को केवल फ्लाइंग स्कूल तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके तहत एक संपूर्ण एविएशन इकोसिस्टम विकसित करने की योजना बनाई गई है, जिसमें कई आधुनिक और रोजगारोन्मुखी कोर्स शामिल होंगे। योजना के अनुसार यहां कमर्शियल पायलट ट्रेनिंग के साथ-साथ एयरोनॉटिकल साइंस, एविएशन मैनेजमेंट, एयरक्राफ्ट ऑपरेशन और तकनीकी प्रशिक्षण से जुड़े विशेष पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा सकते हैं। इससे प्रदेश के युवाओं के लिए करियर के नए दरवाजे खुलेंगे।
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आने वाले समय में ड्रोन टेक्नोलॉजी सबसे तेजी से बढ़ने वाले क्षेत्रों में से एक मानी जा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए परियोजना में ड्रोन संचालन और ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से विशेष "ड्रोन दीदी" कार्यक्रम शुरू करने की भी योजना है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को नई तकनीक से जोड़कर रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा सकें।
इस परियोजना के तहत प्रदेश में एयर एम्बुलेंस सेवाओं की संभावनाओं पर भी काम किया जाएगा। पहाड़ी क्षेत्रों में आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के लिए फिक्स्ड विंग एयर एम्बुलेंस सेवा भविष्य में बड़ी भूमिका निभा सकती है। इसके अलावा एडवेंचर टूरिज्म और एविएशन आधारित पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की योजना है, जिससे प्रदेश के पर्यटन उद्योग को नई गति मिल सकती है।
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कंपनी प्रबंधन के मुताबिक इस पूरे एविएशन हब प्रोजेक्ट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) अंतिम चरण में है, जिसे बेहद जल्द मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व वाली राज्य सरकार को सौंप दिया जाएगा। अगर सरकार की ओर से इस पर त्वरित और सकारात्मक मंजूरी मिलती है, तो एयरो माइल्स एविएशन जमीन पर करोड़ों रुपये का निवेश करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
एयरो माइल्स एविएशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंधन ने कहा कि यह सिर्फ एक फ्लाइंग स्कूल नहीं, बल्कि हिमाचल की आर्थिकी और पर्यटन को बदलने वाला क्रांतिकारी कदम साबित होगा। ड्रोन टेक्नोलॉजी से लेकर एयर एम्बुलेंस जैसी सुविधाएं देवभूमि की पूरी तस्वीर बदल कर रख देंगी।
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प्रदेश के हजारों युवाओं के लिए यह परियोजना किसी सुनहरे अवसर से कम नहीं होगी। पायलट बनने से लेकर ड्रोन विशेषज्ञ और एयरोनॉटिकल प्रोफेशनल बनने तक, अब करियर की नई उड़ान हिमाचल की धरती से ही भरी जा सकेगी।