#राजनीति
June 28, 2026
हिमाचल : अपनों पर खूब बरसे पूर्व CM, बोले- अब कार्यकर्ताओं की नहीं, बड़े नेताओं की बन गई है भाजपा
भाजपा को दोबारा उसी संस्कृति की ओर लौटना होगा
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता शांता कुमार ने एक बार फिर अपनी ही पार्टी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। धर्मशाला में आयोजित 'संविधान हत्या दिवस' कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की असली ताकत हमेशा समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं, लेकिन समय के साथ पार्टी की कार्यशैली में बदलाव आया है।
दरअसल, पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भाजपा पहले कार्यकर्ताओं की पार्टी थी, जबकि अब यह बड़े नेताओं की पार्टी बनती जा रही है। अपने संबोधन में शांता कुमार ने कहा कि आज भाजपा देश की सबसे मजबूत राजनीतिक पार्टी के रूप में स्थापित है।
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इसे इस मुकाम तक पहुंचाने में लाखों कार्यकर्ताओं के संघर्ष, त्याग और समर्पण की सबसे बड़ी भूमिका रही है। उन्होंने कहा कि कठिन दौर में जब पार्टी का जनाधार सीमित था, तब कार्यकर्ताओं ने बिना किसी स्वार्थ के संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार काम किया।
उन्होंने पुराने संघर्षों को याद करते हुए कहा कि एक समय ऐसा भी था जब पार्टी कार्यकर्ताओं के पास सत्ता या संसाधन नहीं थे। उस दौर में केवल देश सेवा का संकल्प था और कार्यकर्ता पुलिस की लाठियां खाते थे, जेल जाते थे, लेकिन अपने सिद्धांतों से पीछे नहीं हटते थे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी RSS और समर्पित कार्यकर्ताओं के सहयोग से भाजपा ने अपनी मजबूत पहचान बनाई।
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पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय भाजपा के लिए स्वर्णिम काल है, लेकिन इस सफलता के बीच पार्टी को अपने मूल सिद्धांतों और संगठनात्मक संस्कृति को नहीं भूलना चाहिए। उनका मानना है कि संगठन की मजबूती का आधार हमेशा कार्यकर्ता ही होते हैं और यदि उन्हें पर्याप्त सम्मान और महत्व नहीं मिलेगा तो संगठन कमजोर पड़ सकता है।
शांता कुमार ने कहा कि आज स्थिति बदलती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार भाजपा की पहचान पहले कार्यकर्ता आधारित संगठन के रूप में थी, लेकिन अब निर्णयों और संगठन में बड़े नेताओं की भूमिका अधिक दिखाई देती है। उन्होंने पार्टी नेतृत्व और कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि भाजपा को दोबारा उसी संस्कृति की ओर लौटना होगा, जहां साधारण कार्यकर्ता को भी सम्मान और बराबरी का अवसर मिले।
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अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं को भी विशेष संदेश दिया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को राजनीति में व्यक्तिगत लाभ के बजाय राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि देश को ऐसे चरित्रवान और राष्ट्रभक्त युवाओं की आवश्यकता है, जो समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
शांता कुमार ने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता को अपने जीवन में प्राथमिकताओं का क्रम तय करना चाहिए। उनके अनुसार सबसे पहले देश, उसके बाद पार्टी और अंत में व्यक्तिगत हित होना चाहिए। उन्होंने चिंता जताई कि आज कई स्थानों पर यह क्रम उलटता दिखाई देता है, जो लोकतांत्रिक मूल्यों और राजनीतिक संस्कृति के लिए उचित नहीं है।