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April 2, 2026

सुक्खू सरकार फिर करने जा रही रिटायर्ड बुजुर्गों की भर्ती, 2.50 लाख प्रतिमाह देगी वेतन; निर्देश जारी

हिमाचल में सेवानिवृत्तों की चांदी, बेरोजगारों के साथ विश्वासघात

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cm sukhu medical collage

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के समय एक लाख नौकरियों की गारंटी देने वाली सुक्खू सरकार अब सेवानिवृत्त अधिकारियों और कर्मचारियों पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान नजर आ रही है। सरकार ने एक बार फिर बेरोजगार युवाओं की उम्मीदों पर पानी फेरते हुए कई विभागों के बाद अब स्वास्थ्य विभाग में भी बुजुर्ग अधिकारियों की दोबारा तैनाती का रास्ता साफ कर दिया है। सरकार के इस फैसले ने प्रदेश के शिक्षित और योग्य बेरोजगारों के बीच एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या राज्य में नई प्रतिभाओं की कमी हो गई है] जो बार-बार रिटायर्ड लोगों को ही मलाईदार पदों पर बिठाया जा रहा है।

2.50 लाख का शाही वेतन

हिमाचल की सुक्खू सरकार ने प्रदेश के नवनिर्मित मेडिकल कॉलेजों नाहन, नेरचौक (मंडी), हमीरपुर और चंबा में प्रोफेसरों की कमी दूर करने के लिए सेवानिवृत्त प्रोफेसरों को अनुबंध पर रखने की मंजूरी दी है। चौंकाने वाली बात यह है कि इन रिटायर्ड प्रोफेसरों को 2.50 लाख रुपये प्रतिमाह का फिक्स्ड मानदेय दिया जाएगा। एक तरफ जहां युवा डॉक्टर और शोधकर्ता स्थायी नियुक्तियों का इंतजार कर रहे हैं, वहीं सरकार अनुभवी फैकल्टी के नाम पर भारी-भरकम वेतन देकर बुजुर्गों की 'मौज' करवा रही है।

 

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युवाओं को गारंटी का झुनझुना, बुजुर्गों का मिल रही तैनाती

विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने युवाओं से वादा किया था कि कैबिनेट की पहली बैठक में एक लाख नौकरियों का पिटारा खुलेगा। लेकिन हकीकत यह है कि बिजली बोर्ड से लेकर सचिवालय और अब स्वास्थ्य विभाग तक, सरकार लगातार रिटायर्ड अधिकारियों को री-अपॉइंटमेंट (दोबारा नियुक्ति) दे रही है। बेरोजगार युवाओं का आरोप है कि सरकार उन्हें 'वन मित्र' और 'पशु मित्र' जैसी अस्थायी और कम वेतन वाली भर्तियों में उलझा रही है, जबकि ऊंचे पदों और भारी वेतन वाले काम रिटायर्ड लोगों की झोली में डाले जा रहे हैं।

 

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शिक्षित बेरोजगारों के साथ 'विश्वासघात'

स्वास्थ्य विभाग की दलील है कि मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता और मरीजों के बेहतर उपचार के लिए प्रोफेसरों की भारी कमी है, जिसे पूरा करने के लिए यह 'अंतरिम व्यवस्था' की गई है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या सरकार के पास स्थायी भर्ती प्रक्रिया को तेज करने का कोई रोडमैप नहीं है? युवाओं का कहना है कि रिटायर्ड लोगों को दोबारा नौकरी देना सीधे तौर पर बेरोजगारों के हक पर डाका डालने जैसा है। क्या हिमाचल के युवाओं में इतनी काबिलियत नहीं है कि वे इन प्रोफेसर स्तर के पदों को संभाल सकें?

 

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मेडिकल शिक्षा निदेशक को 'तत्काल भर्ती' के निर्देश

सरकार ने इस मामले को 'अत्यंत जरूरी' बताते हुए मेडिकल शिक्षा निदेशक को निर्देश दिए हैं कि वे बिना समय गंवाए विज्ञापन जारी करें और भर्ती प्रक्रिया शुरू करें। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये नियुक्तियां क्लिनिकल और नॉन-क्लिनिकल दोनों विषयों के लिए होंगी। हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया है कि सभी नियुक्तियां सरकार की पूर्व स्वीकृति के बाद ही होंगी, जिससे यह साफ है कि किन 'पसंदीदा' चेहरों को दोबारा सिस्टम में लाना है, इसका फैसला भी राजनीतिक गलियारों से ही होगा।

 

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बेरोजगारों का बढ़ता गुस्सा

प्रदेश के युवा मंचों ने सरकार के इस कदम की कड़ी निंदा की है। सोशल मीडिया पर भी सुक्खू सरकार की खिंचाई हो रही है कि एक तरफ युवा प्रतियोगी परीक्षाओं के रिजल्ट का इंतजार कर रहे हैं और दूसरी तरफ 60 पार कर चुके अधिकारियों के लिए खजाने के दरवाजे खोल दिए गए हैं। युवाओं का कहना है कि सरकार उन्हें वन मित्र और पशु मित्र बनाकर केवल 'मजदूरी' दे रही है, जबकि असली 'शाही नौकरियां' तो अभी भी पुराने और रिटायर्ड चेहरों के पास ही जा रही हैं।

 

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