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January 6, 2026
पंचायत चुनावों को लेकर कटघरे में सुक्खू सरकार, हाईकोर्ट में हुई तीखी बहस
पंचायत स्तर पर प्रभावित होंगे विकास कार्य
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर करवाने की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर आज यानी मंगलवार को हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। लंबी बहस के बावजूद सुनवाई पूरी नहीं हो सकी, जिसके चलते अदालत ने बुधवार को भी सुनवाई जारी रखने के निर्देश दिए हैं।
याचिका में मांग की गई है कि, राज्य में पंचायती राज संस्थानों के चुनाव संविधान के प्रावधानों के अनुसार अनिवार्य रूप से पांच वर्ष का कार्यकाल समाप्त होने से पहले कराए जाएं। याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया है कि राज्य चुनाव आयोग को तत्काल चुनाव कार्यक्रम अधिसूचित करने और बिना किसी देरी के स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए जाएं।
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इसके साथ ही याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि वर्तमान पंचायती राज संस्थाओं को उनके निर्धारित कार्यकाल से आगे बढ़ाने का कोई प्रयास किया जाता है, तो उसे असंवैधानिक घोषित किया जाए।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि समय पर चुनाव न होने से लोकतांत्रिक व्यवस्था और पंचायत स्तर पर विकास कार्य प्रभावित होंगे। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व में दर्ज रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया।
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अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ध्यान में रखते हुए 2 दिसंबर 2024 को पंचायती राज विभाग को पुनर्गठन, परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया 30 जून 2025 तक पूरी करने के निर्देश दिए थे, ताकि चुनाव प्रक्रिया शुरू की जा सके।
हालांकि, इसके बाद कार्रवाई न होने पर 10 जुलाई 2025 को शहरी विकास विभाग के प्रधान सचिव ने उपायुक्तों को जनगणना में देरी का हवाला देते हुए शहरी निकायों के आरक्षण रोस्टर को स्थगित करने का पत्र जारी किया। राज्य चुनाव आयोग ने इस पत्र को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए अमान्य करार दिया और आरक्षण प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए।