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January 6, 2026
हिमाचल के कर्मचारियों ने मोदी सरकार से मांगे अपने 12 हजार करोड़ रुपए, सीएम सुक्खू से भी की ये मांग
कर्मचारी संघ बोला: एनपीएस के पैसे पर राजनीति नहीं होनी चाहिए यह भविष्य का सवाल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के कर्मचारियों की पेंशन से जुड़ा सबसे बड़ा मुद्दा अब एक बार फिर गरमा गया है। नई पेंशन योजना (एनपीएस) के तहत केंद्र सरकार के पास लंबित करीब 12 हजार करोड़ रुपये को लेकर प्रदेश में बेचैनी बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू इस राशि को राज्य को लौटाने की मांग कई बार केंद्र सरकार के समक्ष उठा चुके हैं, लेकिन अब खुद कर्मचारी संगठनों ने मोदी सरकार से सीधा आग्रह किया है कि उनका एनपीएस का पैसा उन्हें वापस लौटाया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि यह रकम उनके भविष्य और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी है, किसी भी तरह का राजनीतिक मुद्दा नहीं।
हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने शिमला में केंद्र सरकार से एनपीएस के तहत जमा की गई लगभग 12,000 करोड़ रुपये की राशि शीघ्र जारी करने की मांग उठाई। संघ के राज्य अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान और महासचिव तिलक नायक ने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा ओल्ड पेंशन स्कीम (ओपीएस) लागू किए जाने के बाद यह स्वाभाविक अपेक्षा है कि कर्मचारियों और राज्य सरकार के अंशदान से संबंधित यह राशि अब केंद्र सरकार द्वारा राज्य को लौटाई जाए। उन्होंने कहा कि यह धन कर्मचारियों की मेहनत की कमाई है, जो उनके रिटायरमेंट और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। इस राशि को लंबे समय तक रोके रखना कर्मचारियों के भरोसे के साथ अन्याय है।
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कर्मचारी संगठनों ने यह भी याद दिलाया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू स्वयं कई मंचों से केंद्र सरकार से इस धनराशि की मांग कर चुके हैं। बावजूद इसके, अभी तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। ऐसे में अब कर्मचारी संगठनों ने उम्मीद जताई है कि मोदी सरकार इस विषय पर संवेदनशीलता दिखाएगी और संवाद के जरिए समाधान निकालेगी।
अध्यापक संघ ने स्पष्ट किया कि एनपीएस का यह मुद्दा किसी भी प्रकार से राजनीतिक नहीं है। यह कर्मचारियों के भविष्य, सुरक्षा और विश्वास से जुड़ा प्रश्न है। संघ ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि आपसी सहयोग और सहमति के माध्यम से इस लंबित राशि पर शीघ्र निर्णय लिया जाए, ताकि कर्मचारियों की आशंकाएं दूर हो सकें।
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इस दौरान संघ ने हिमाचल की सुक्खू सरकार के समक्ष भी अपनी लंबित मांगों को रखा। जिसमें दो वर्ष की सेवा पूरी करने वाले कर्मचारियों को वर्ष में दो बार नियमित करने] हाल ही में पदोन्नत प्रधानाचार्यों को शीघ्र स्टेशन आवंटित करने और पदोन्नति से वंचित पात्र अभ्यर्थियों के लिए सप्लीमेंट्री सूची जारी करने की मांग शामिल है। इसके अलावा कैशलेस हेल्थ इंश्योरेंस योजना के साथ मेडिकल अलाउंस का विकल्प दोबारा खोलने, स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा ली जा रही लेट फीस और पेनल्टी समाप्त करने तथा केंद्र सरकार की तर्ज पर नया वेतन आयोग जल्द लागू करने की मांग भी की गई।
प्रदेश के जनजातीय क्षेत्रों समेत कई सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में तैनात स्कूल प्रबंधन समिति (एसएमसी) के तहत कार्यरत सैकड़ों अध्यापकों को पिछले कई महीनों से वेतन नहीं मिला है। चंबा और अन्य जनजातीय जिलों में तैनात शिक्षकों को अक्तूबर, नवंबर और दिसंबर का वेतन अब तक नहीं दिया गया।
हिमाचल प्रदेश संयुक्त कर्मचारी महासंघ ने अनुबंध कर्मचारियों के नियमितीकरण में हो रहे भेदभाव को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। महासंघ का कहना है कि वर्ष में केवल एक बार मार्च माह में नियमितीकरण की नीति के कारण समान परिस्थितियों में कार्यरत कर्मचारियों के साथ अन्याय हो रहा है।