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March 7, 2026
सुक्खू सरकार का बड़ा झटका: घर- फ्लैट निर्माण के रातों-रात बदल दिए नियम, जेब पर बढ़ेगा बोझ
सुक्खू सरकार ने लागू की नई शुल्क व्यवस्था, तीन से सात हजार प्रति वर्ग मीटर लगेगा शुल्क
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में घर बनाने का सपना देखने वाले लोगों को प्रदेश की सुक्खू सरकार ने बड़ा झटका दिया है। सुक्खू सरकार ने रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र से जुड़े नियमों में अचानक बड़ा बदलाव कर दिया है। नगर एवं ग्राम योजना (टीसीपी) विभाग की ओर से जारी नई अधिसूचनाओं के बाद अब प्रदेश में अतिरिक्त निर्माण करने पर लोगों और बिल्डरों को पहले से ज्यादा पैसा चुकाना पड़ेगा। लोगों से अब प्रति वर्गमीटर तीन हजार से सात हजार तक की राशि वसूली जाएगी।
सरकार ने प्रीमियम एफएआर (फ्लोर एरिया रेशियो) के नियमों में संशोधन करते हुए इसके लिए नई शुल्क व्यवस्था लागू कर दी है। इस फैसले के बाद साफ हो गया है कि अब हिमाचल में मकान बनाना पहले से ज्यादा महंगा हो जाएगा। आम लोगों के लिए अपना सपनों का घर बनाना और भी मुश्किल हो सकता है] क्योंकि अतिरिक्त निर्माण के लिए अब जेब और ज्यादा ढीली करनी पड़ेगी।
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टीसीपी विभाग की ओर से 27 फरवरी 2026 को जारी अधिसूचनाएं अब राजपत्र में प्रकाशित कर दी गई हैं और इनके साथ ही नए नियम लागू हो गए हैं। सरकार का तर्क है कि इन बदलावों का मकसद शहरी क्षेत्रों में योजनाबद्ध विकास को बढ़ावा देना और राज्य के राजस्व में बढ़ोतरी करना है।
नई व्यवस्था के तहत अब प्रीमियम एफएआर लेने के लिए प्रति वर्गमीटर के हिसाब से शुल्क देना होगा। इसके लिए सरकार ने तीन अलग-अलग स्लैब तय किए हैं।
इस फैसले के बाद माना जा रहा है कि प्रदेश में बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स के साथ-साथ निजी भवन निर्माण की लागत भी बढ़ सकती है।
हालांकि सरकार ने पहले से पूरी हो चुकी परियोजनाओं को इस नियम से बाहर रखा है। जिन भवनों या रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को पहले ही कंप्लीशन सर्टिफिकेट मिल चुका है, उन पर यह नया शुल्क लागू नहीं होगा। जो प्रोजेक्ट्स अभी निर्माणाधीन हैं, उनके लिए अलग व्यवस्था की गई है। जिन हिस्सों का निर्माण पूरा हो चुका है और जिनका प्रमाणन हो गया है, उन पर कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा। लेकिन जिन हिस्सों में अभी निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, वहां नया नियम लागू होगा।
सरकार ने इसके साथ ही एक और बड़ा फैसला लिया है। अब 750 वर्गमीटर से अधिक निर्मित क्षेत्र वाले व्यावसायिक, सार्वजनिक और रियल एस्टेट भवनों के लिए ऊर्जा संरक्षण भवन संहिता (एचपीईसीबीसी 2018) का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है। इसके दायरे में होटल, अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और व्यावसायिक भवन शामिल होंगे।
सरकार ने सभी नए व्यावसायिक और सार्वजनिक भवनों में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्वाइंट बनाना भी अनिवार्य कर दिया है। इसका उद्देश्य भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्यावरण अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करना बताया जा रहा है।
सरकार ने ग्रीन बिल्डिंग को बढ़ावा देने के लिए भी नई व्यवस्था लागू की है। यदि कोई भवन मान्यता प्राप्त संस्थान से ग्रीन रेटिंग हासिल करता है तो उसे 0.25 अतिरिक्त एफएआर मुफ्त दिया जाएगा। लेकिन यदि कोई परियोजना तय ग्रीन रेटिंग हासिल नहीं कर पाती है, तो उस पर सामान्य शुल्क से दस गुना तक जुर्माना लगाया जा सकता है।
सरकार के इस फैसले को लेकर लोगों और रियल एस्टेट से जुड़े कारोबारियों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि पहले से ही निर्माण सामग्री के दाम बढ़े हुए हैं और अब नए शुल्क लगने से मकान बनाना और महंगा हो जाएगा। ऐसे में आम लोगों के लिए अपना घर बनाना पहले से ज्यादा कठिन हो सकता है।