#विविध
April 26, 2025
हिमाचल सरकार का एक और यू-टर्न- अब BDO नहीं, पंचायत प्रधान ही खरीदेंगे सामग्री
पंचायत प्रधानों के गुस्से को देखकर बदला फैसला
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में इस साल के आखिर में होने वाले पंचायत चुनाव से पहले ग्राम प्रधानों के बगावती तेवर देखकर सुक्खू सरकार ने अपने ही फैसले से यू-टर्न ले लिया है। सरकार ने इस साल 5 अप्रैल को BDO की कमेटी के जरिए पंचायतों में मनरेगा के तहत विभिन्न निर्माण कार्यों की सामग्री खरीदने का आदेश जारी किया था।
इसके बाद 22 अप्रैल को पंचायत प्रधानों ने आकर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू से इसकी शिकायत की थी। पंचायत प्रधानों का कहना था कि सरकार के आदेश से उनका हक छीना गया है। दरअसल, सरकार ने सामग्री की खरीद में भ्रष्टाचार को रोकने और पारदर्शिता लाने के लिए पंचायत प्रधानों के बजाय BDO की कमेटी को सामग्री के लिए टेंडर मंगवाने के आदेश दिए थे।
इसके खिलाफ पंचायत प्रधानों ने सीएम के सामने ही बगावती तेवर दिखा दिए। राज्य में पंचायती चुनाव ने ठीक पहले इस तरह के बगावती तेवर को देखकर सरकार दबाव में आ गई और शनिवार को पंचायत प्रधानों के माध्यम से ही सामग्री खरीद की पुरानी व्यवस्था को लागू कर दिया।
इससे पहले BDO की कमेटी ने राज्य के 91 में से 40 ब्लॉक में सामग्री खरीद के लिए टेंडर निकाले थे। नए आदेश में इन पर भी रोक लग गई है। मनरेगा सहित अन्य मदों (एमएलए, एमपी और डीसी फंड) से होने वाले निर्माण कार्यों के लिए ईंट, रेत और बजरी की खरीद की जाती है। सचिव ग्रामीण विकास के नए आदेश में इन सभी चीजों की खरीद अब पंचायत प्रधानों के हवाले कर दी गई है।
हिमाचल प्रदेश में चंबा जिले के भटियात की बलेरा पंचायत के प्रधान को करप्शन केस में सस्पेंड कर दिया गया है। ग्राम प्रधान ने मनरेगा की सामग्री सप्लाई के लिए अपने एक रिश्तेदार को वेंडर बना दिया। इससे भी आगे बढ़कर उसने एक सरकारी मुलाजिम को मनरेगा मस्टर रोल में दिहाड़ी दे दी। कर्मचारी डलहौजी में पोस्टेड है।
इस मामले में स्थानीय निवासी पंकज पलभर की शिकायत के बाद सरकार ने जांच बिठाई तो सारे आरोप सही साबित हुए। इसके बाद ग्राम प्रधान को कारण बताओ नोटिस दिया गया, जिस पर उसने गोलमोल जवाब दिया। आखिर में बलेरा पंचायत के ग्राम प्रधान को सस्पेंड किया गया है। प्रशासन ने उसके खिलाफ केस दर्ज कर आगे की कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।