#विविध

February 3, 2026

सुक्खू सरकार को झटका: वित्त आयोग ने माना हिमाचल "अमीर" राज्य, केंद्र से मदद घटने की आशंका

वित्त आयोग अध्यक्ष ने हिमाचल के कर्ज और खर्च पर उठाए सवाल

शेयर करें:

himachal-economy-News

शिमला। 16वें वित्त आयोग की ताज़ा टिप्पणियों ने हिमाचल प्रदेश की राजनीति और आर्थिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। प्रदेश की सुक्खू सरकार को आयोग से बड़ी राहत और विशेष सहायता की उम्मीद थी, लेकिन आयोग की रिपोर्ट में की गई टिप्पणियां इन उम्मीदों को कमजोर करती नजर आ रही हैं। खासकर हिमाचल को “अमीर पहाड़ी राज्य” की श्रेणी में रखे जाने के बाद आने वाले समय में केंद्र से मिलने वाली आर्थिक मदद पर सवाल खड़े हो गए हैं।

हिमाचल को अमीर राज्य बताने से बढ़ी चिंता

वित्त आयोग के अध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया द्वारा हस्ताक्षरित रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश को सिक्किम और उत्तराखंड के साथ पहाड़ी राज्यों में प्रति व्यक्ति आय के लिहाज से समृद्ध राज्य बताया गया है। आयोग का मानना है कि इन राज्यों ने पिछले कुछ दशकों में बेहतर विकास किया है और औद्योगिक इकाइयों को केंद्र से मिली टैक्स रियायतों का भी भरपूर लाभ उठाया है। हालांकि, इसी टिप्पणी को लेकर हिमाचल में चिंता गहराने लगी है, क्योंकि “अमीर राज्य” की छवि बनने से केंद्र सरकार भविष्य में विशेष पैकेज या अतिरिक्त सहायता में कटौती कर सकती है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल : ग्राहक का इंतजार कर रहे थे चरस तस्कर, किसी ने पुलिस को घुमा दिया फोन- पहुंचे जेल

पूंजीगत खर्च में हिमाचल पिछड़ा

आयोग की रिपोर्ट में हिमाचल प्रदेश पर एक और बड़ा सवाल खड़ा किया गया है। आयोग के अनुसार हिमाचल, मिजोरम और त्रिपुरा जैसे राज्य अपने बजट का बहुत छोटा हिस्सा पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) पर खर्च कर रहे हैं। इसके उलट, वेतन, सब्सिडी और ब्याज भुगतान जैसे बार-बार होने वाले खर्चों को प्राथमिकता दी जा रही है। यह स्थिति तब और गंभीर लगती है, जब अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्य अपने कुल खर्च का 29.2 प्रतिशत कैपिटल प्रोजेक्ट्स पर खर्च कर रहे हैं।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: अटल टनल के पास चार गाड़ियों पर आ गिरे तीन एवलांच, अंदर बैठे थे कई लोग

कर्ज का बढ़ता बोझ बना बड़ा विरोधाभास

वित्त आयोग ने हिमाचल की आर्थिक स्थिति को लेकर एक “विरोधाभास” की ओर भी इशारा किया है। जहां एक ओर राज्य को अपेक्षाकृत समृद्ध माना गया है, वहीं दूसरी ओर हिमाचल का कर्ज-से-GSDP अनुपात लंबे समय से चिंताजनक बना हुआ है। कोविड-19 के दौरान यह अनुपात 45 प्रतिशत तक पहुंच गया था और 2023-24 में भी यह 42.8 प्रतिशत पर बना हुआ है। आयोग के अनुसार, यह स्थिति हिमाचल की आर्थिक स्थिरता के लिए खतरे की घंटी है।

रेवेन्यू सरप्लस से घाटे तक का सफर

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि हिमाचल प्रदेश ने कई वर्षों तक 2021-22 तक राजस्व अधिशेष (रेवेन्यू सरप्लस) बनाए रखा था। लेकिन इसके बाद हालात तेजी से बदले। 2022-23 और 2023-24 में राज्य को बड़ा रेवेन्यू घाटा झेलना पड़ा। इसके साथ ही राजकोषीय घाटा भी तेजी से बढ़ा, जो वित्तीय अनुशासन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।

 

यह भी पढ़ें : HRTC बस हा*दसा: अब तक चार लोगों की मौ*त, CM के घायलों को एयरलिफ्ट करने के निर्देश

टैक्स क्षमता ज्यादा, इसलिए अलग नजरिया

वित्त आयोग ने हिमाचल प्रदेश को असम और उत्तराखंड के साथ उन राज्यों में रखा है, जहां टैक्स वसूलने की क्षमता अधिक मानी गई है। इसी आधार पर आयोग ने इन राज्यों के लिए करों की हिस्सेदारी में अलग मानक अपनाने की सिफारिश की है। आयोग का तर्क है कि जिन राज्यों की टैक्स क्षमता ज्यादा है, उन्हें अतिरिक्त सहायता की जरूरत कम होती है। यह तर्क भी हिमाचल को मिलने वाली भविष्य की केंद्रीय मदद पर असर डाल सकता है।

सुक्खू सरकार की उम्मीदों को झटका?

प्रदेश में यह चर्चा तेज हो गई है कि सुक्खू सरकार को 16वें वित्त आयोग से जिस तरह की राहत और विशेष सहयोग की उम्मीद थी, वह पूरी होती नजर नहीं आ रही। हिमाचल को आर्थिक रूप से मजबूत दिखाने वाली टिप्पणियां सरकार के लिए दोधारी तलवार साबित हो सकती हैं। एक ओर यह राज्य की विकास क्षमता को दर्शाती हैं, तो दूसरी ओर केंद्र से मिलने वाली मदद में संभावित कटौती की आशंका भी बढ़ा रही हैं।

यह भी पढ़ें : हिमाचल : भक्ति में लीन युवक को लगा करंट का झटका, नहीं बच पाया बेचारा- 20 साल थी उम्र

आने वाले समय में बढ़ेगी चुनौती

कुल मिलाकर 16वें वित्त आयोग की रिपोर्ट हिमाचल प्रदेश के लिए एक तरह का आर्थिक आईना बनकर सामने आई है। यह रिपोर्ट जहां राज्य की ताकत और टैक्स क्षमता को उजागर करती है, वहीं बढ़ते कर्ज, कम पूंजीगत खर्च और वित्तीय घाटों की ओर भी इशारा करती है। आने वाले समय में सुक्खू सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह इन टिप्पणियों के बीच केंद्र से अपने हितों को कैसे सुरक्षित रखती है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख