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April 21, 2026
हिमाचल में बदली PM मोदी के 'ड्रीम प्रोजेक्ट' की दिशा, अब 'बिजली महादेव' नहीं, काइसधार' तक बनेगा रोपवे
भारी जन.विरोध और देव.संसद के फैसले के बाद बदला बिजली महादेव रोपवे का नाम और रास्ता
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश की पर्यटन राजधानी कुल्लू में आखिरकार जनभावनाओं और आस्था की जीत हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट माने जाने वाले 'बिजली महादेव रोपवे' की रूपरेखा को भारी विरोध और धार्मिक मान्यताओं के चलते पूरी तरह बदल दिया गया है। स्थानीय लोगों और देवी-देवताओं के प्रतिनिधियों के तीखे विरोध के बाद केंद्र और प्रदेश स्तर पर मंथन हुआ और आखिरकार इसकी रूपरेखा बदल दी गई।
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अब यह रोपवे बिजली महादेव मंदिर तक नहीं जाएगा, बल्कि पर्यटकों को पिरड़ी से काइसधार की खूबसूरत वादियों तक ले जाएगा। सरकार ने इस नए मार्ग को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है] जिसे अब 'महाराजा रोपवे' के नाम से जाना जाएगा।
दरअसल, यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट्स में शामिल मानी जा रही थी। शुरुआत में योजना पिरड़ी से सीधे बिजली महादेव तक रोपवे बनाने की थी, जिसकी लंबाई करीब 2 से 3 किलोमीटर निर्धारित की गई थी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा वर्ष 2024 में इसका भूमि पूजन भी किया गया था। लेकिन जैसे ही परियोजना जमीन पर उतरने लगी, खराहल घाटी और कशावरी फाटी की पंचायतों के लोग इसके विरोध में उतर आए।
विरोध केवल आम लोगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देव संस्कृति के लिए प्रसिद्ध कुल्लू में देवी-देवताओं की ‘देव संसद’ तक में इस मुद्दे ने जोर पकड़ा। नग्गर में आयोजित बड़ी जगती में सैकड़ों देवी-देवताओं के प्रतिनिधियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि देव स्थलों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ स्वीकार नहीं होगी। उनका मानना था कि रोपवे से धार्मिक आस्था और देव परंपराओं की शांति भंग हो सकती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस विरोध का संज्ञान लिया और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय कमेटी का गठन किया गया था। इस कमेटी को संघर्ष समिति और छड़ीबरदार महेश्वर सिंह के साथ बैठक कर बीच का रास्ता निकालने का जिम्मा सौंपा गया था। इस कमेटी ने प्रभावित पक्षों से बातचीत कर समाधान का रास्ता निकालने का प्रयास किया।
लगातार विरोध और सामाजिक.सांस्कृतिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आखिरकार सरकार ने इस परियोजना की दिशा ही बदल दी। अब नया प्रस्ताव पिरड़ी से काइसधार तक करीब 4 किलोमीटर लंबे रोपवे का है। वहीं इस परियोजना का नाम भी बदल दिया गया है। पहले जो रोपवे बिजली महादेव नाम से बन रहा था। अब उसका नाम महाराजा रोपवे रखा गया है। इस नई योजना को स्थानीय पंचायतों बल्ह दो और बाराहार का समर्थन भी मिल चुका है और उन्होंने अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) जारी कर दिया है।
नई रूपरेखा के तहत परियोजना की लागत भी बढ़ाकर करीब 300 करोड़ रुपये कर दी गई है। ड्रोन सर्वे समेत अन्य औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं और इसे सैद्धांतिक मंजूरी भी मिल गई है। इस रोपवे का नाम ‘महाराजा रोपवे’ प्रस्तावित किया गया है, जो आने वाले समय में काइसधार क्षेत्र को एक नए पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित कर सकता है।
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महाराजा कोठी विकास मंच के सचिव सुखराम ठाकुर ने बताया कि काइसधार एक बेहद सुंदर पर्यटन स्थल है, लेकिन सुविधाओं की कमी के कारण वहां तक सैलानी नहीं पहुंच पाते थे। पिरड़ी से काइसधार तक रोपवे बनने से न केवल पर्यटकों को एक नया डेस्टिनेशन मिलेगा, बल्कि स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार भी खुलेंगे। ड्रोन के जरिए सर्वे का काम पूरा हो चुका है और औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं।