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April 18, 2026
हिमाचल: इस पंचायत में नहीं होंगे चुनाव! ग्रामीणों ने सहमति से चुन लिए सभी प्रतिनिधि; पेश की मिसाल
पंचायत चुनाव की तारीखों के ऐलान से पहले ही सर्वसम्मति से बनी पूरी पंचायत
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनाव की तारीखों का इंतजार अभी जारी हैए लेकिन इसी बीच जिला बिलासपुर से एक ऐसी खबर सामने आई हैए जिसने लोकतंत्र के एक अलग ही रूप को उजागर किया है। यहां घुमारवीं उपमंडल की नवगठित छंदोह पंचायत के लोगों ने आपसी भाईचारे और एकता की अनूठी मिसाल पेश करते हुए बिना किसी चुनावी मुकाबले के पूरी पंचायत का सर्वसम्मति से गठन कर लिया।
छंदोह पंचायत जो दधोल व पडयालग पंचायतों से अलग होकर बनी है, ने विकास को सर्वोपरि मानते हुए यह ऐतिहासिक निर्णय लिया। गांव के लोगों ने मिल बैठकर प्रधान, उपप्रधान और सभी वार्ड पंचों के नाम तय कर दिए। खास बात यह रही कि इस प्रक्रिया में किसी तरह का विवाद सामने नहीं आया, बल्कि सभी ने विकास को प्राथमिकता देते हुए आपसी सहमति से निर्णय लिया।
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पंचायत के लोगों ने दर्शाया कि आपसी समझ और भाईचारे से किसी भी समस्या का समाधान निकाला जा सकता है, यहां तक कि चुनाव जैसी जटिल प्रक्रिया को भी। पूर्व प्रधान मेहर सिंह की अध्यक्षता में हुई एक विशेष बैठक में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से सभी पदों पर नाम तय किए, हालांकि इच्छुक उम्मीदवारों के लिए चुनाव लड़ने का विकल्प खुला रखा गया है।
नवगठित पंचायत में छंदोह, मरयानी, जसवानी, डोहरु और पन्याली गांव शामिल हैं। सर्वसम्मति से सुभाष रणौत को प्रधान और बलजीत कश्यप को उपप्रधान चुना गया। वहीं वार्ड पंचों में जसवानी से सोनू, मरयानी से प्रकाश, पन्याली से बनिता, डोहरु से पूनम और छंदोह वार्ड से ओमकार के नाम पर सहमति बनी।
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नवनिर्वाचित प्रधान सुभाष रणौत ने अपनी प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए बताया कि पंचायत में सड़कों की खराब स्थिति को सुधारना उनका पहला लक्ष्य है। इसके साथ ही, पेयजल समस्या के समाधान के लिए हैंडपंप स्थापित करना भी उनकी प्राथमिकता में शामिल है। उपप्रधान बलजीत कश्यप ने कहा कि पंचायत के सभी गाँवों के समग्र विकास के लिए वे सभी मिलजुल कर कार्य करेंगे और आपसी भाईचारे को और मजबूत बनाएंगे।
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छंदोह पंचायत का यह निर्णय न केवल बिलासपुर के लिए, बल्कि पूरे हिमाचल प्रदेश के लिए एक प्रेरणा स्रोत है। यह दर्शाता है कि आपसी समझ और एकता से विकास की राह और भी आसान हो सकती है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब पंचायत चुनावों में अक्सर प्रतिस्पर्धा और मतभेद देखने को मिलते हैं।