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March 7, 2026

हिमाचल : मौ.त के बाद भी समाज के काम आए सीताराम, दान किया शरीर- बेटों ने ऐसे दी अंतिम विदाई

समाज के लिए मिसाल बने सीताराम खावला, अंतिम इच्छा के अनुसार किया गया देहदान

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body donation himachal

हमीरपुर। हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर स्थित नादौन क्षेत्र के कोहला गांव के रहने वाले बीएसएनएल से सेवानिवृत्त सब इंस्पेक्टर 79 वर्षीय सीताराम खावला ने जीवन के बाद भी समाज के लिए मिसाल कायम कर दी। उनके निधन के बाद परिवार ने उनकी अंतिम इच्छा का सम्मान करते हुए पार्थिव देह डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर को चिकित्सा शिक्षा के लिए सौंप दी।

निधन के बाद किया शरीर

शुक्रवार सुबह उनका निधन हुआ, जिसके बाद परिजन और ग्रामीणों ने पूरे सम्मान के साथ उनकी देह को एंबुलेंस में रखकर मेडिकल कॉलेज तक पहुंचाया। रास्ते में भजनों की धुनों के बीच देह को सम्मानपूर्वक ले जाया गया, जिसे देखने वाले भी भावुक हो उठे।

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देहदान का निर्णय दो वर्ष पहले लिया

सीताराम खावला ने जुलाई 2024 में देहदान का संकल्प लिया था और इसके लिए औपचारिक शपथपत्र भी भरा था। उनके पुत्र और नादौन के उद्यमी विनोद खावला ने बताया कि पिता ने पहले ही परिवार को इस फैसले के बारे में बता दिया था।

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शुरुआत में परिवार के कुछ सदस्यों ने सामाजिक परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं का हवाला देकर उन्हें इस निर्णय पर दोबारा सोचने को कहा, लेकिन सीताराम अपने संकल्प पर अडिग रहे।

मृत्यु से एक दिन पहले भी दी थी हिदायत

परिजनों के अनुसार, अपने निधन से एक दिन पहले भी उन्होंने परिवार को स्पष्ट कहा था कि जब भी उनका देहांत हो, उनकी देह को मेडिकल कॉलेज की अमानत समझकर बिना किसी रीति-रिवाज के सीधे चिकित्सा शिक्षा के लिए सौंप दिया जाए। परिवार ने भी उनकी इस इच्छा का पूरा सम्मान किया और अंतिम संस्कार की पारंपरिक प्रक्रिया के बजाय देहदान की प्रक्रिया अपनाई।

चिकित्सा शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण योगदान

डॉ. राधाकृष्णन मेडिकल कॉलेज हमीरपुर के प्रिंसिपल डॉ. रमेश भारती ने इस निर्णय को बेहद प्रेरणादायक बताया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा शिक्षा में देहदान का विशेष महत्व है, क्योंकि मेडिकल छात्र मानव शरीर की संरचना और अंगों की कार्यप्रणाली को समझने के लिए दान की गई देह पर अध्ययन करते हैं।

 

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उन्होंने सीताराम खावला के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि उनका यह योगदान चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।

प्रदेश में बढ़ रही देहदान की पहल

प्रदेश के विभिन्न मेडिकल कॉलेजों में देहदान के प्रति लोगों की जागरूकता बढ़ रही है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला में अब तक 455 लोगों ने देहदान के लिए शपथपत्र भरे हैं। टांडा मेडिकल कॉलेज में 150 लोग इसके लिए पंजीकरण करा चुके हैं और अब तक 20 पार्थिव देह कॉलेज को सौंपी जा चुकी हैं। वहीं हमीरपुर मेडिकल कॉलेज में भी पिछले ढाई वर्षों में पांच देह चिकित्सा शिक्षा के लिए दान की जा चुकी हैं। सीताराम खावला का यह कदम समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मानव सेवा की भावना को आगे बढ़ाने वाली एक प्रेरक मिसाल बन गया है।

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