#विविध
July 27, 2025
परंपरा : जहां आस्था नहीं देखती मजहब, भगवान रघुवीर को अर्पित होती है मुस्लिम परिवार की बनाई मिंजर
आठ दिन तक धूमधाम से चलेगा ऐताहासिक मिंजर मेला
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चंबा। हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला 2025 रविवार से धूमधाम के साथ आरंभ हो गया। यह भव्य उत्सव 27 जुलाई से 3 अगस्त तक चलेगा। आठ दिनों तक चलने वाला यह मेला विजय, समृद्धि, आस्था और सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक माना जाता है।
इसकी शुरुआत परंपरागत ध्वजारोहण और शोभायात्रा के साथ हुई। एक सप्ताह तक चलने वाले इस मिंजर मेले की शोभा बढ़ाने और मुख्यातिथि के तौर पर हिमाचल प्रदेश के महामहिम राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ला ने शिरकत की।
इस मेले की खास बात यह है कि इसमें हिंदू-मुस्लिम एकता की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है। सदियों से चंबा का मुस्लिम मिर्जा परिवार मेले के लिए मिंजर (धान और मक्की की बालियां) तैयार करता है और इसे भगवान रघुवीर जी को अर्पित करता है। इस बार यह धार्मिक रस्म एजाज मिर्जा ने निभाई।
स्थानीय भाषा में मक्की और धान की बालियों को ‘मिंजर’ कहा जाता है। यही मिंजर रेशमी धागों और मोतियों से सजाकर भगवान लक्ष्मीनारायण और रघुवीर जी को अर्पित की जाती है। एक सप्ताह बाद, इन्हें रावी नदी में प्रवाहित कर उत्सव का समापन किया जाता है।
इतिहास के अनुसार, मिंजर मेले की शुरुआत 935 ईस्वी में हुई, जब राजा साहिल वर्मन ने कुरुक्षेत्र के युद्ध में विजय प्राप्त की थी। जब वह चंबा लौटे तो स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत धान और मक्की की बालियों से किया जो बाद में मिंजर मेला के रूप में विकसित हुआ।
मेले के पहले दिन ऐतिहासिक लक्ष्मीनाथ और बंसी गोपाल मंदिरों में पूजा-अर्चना के बाद शोभायात्रा निकाली गई, जो पिंक पैलेस स्थित भगवान रघुवीर मंदिर तक पहुंची। अंतिम दिन नगर परिषद चंबा की ओर से एक विशाल शोभायात्रा के साथ मिंजर को रावी नदी में अर्पित किया जाएगा।
जहां शुरुआत में यह उत्सव केवल तीन दिन मनाया जाता था, अब इसकी लोकप्रियता और सांस्कृतिक महत्व को देखते हुए इसे आठ दिनों तक भव्य रूप में आयोजित किया जाता है।