#विविध
August 26, 2025
हिमाचल के ऐतिहासिक दशहरा उत्सव की तैयारियां शुरू, 332 देवी-देवताओं को भेजे निमंत्रण
पिछले साल से अधिक देवी-देवताओं के आने की उम्मीद
शेयर करें:
कुल्लू। देवभूमि हिमाचल के सबसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक महाकुंभ अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की तैयारियां इस बार भी जोर-शोर से चल रही हैं। इस उत्सव को लेकर जिला प्रशासन और दशहरा उत्सव समिति ने व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है।
ऐतिहासिक दशहरा उत्सव 2 से 8 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। इस बार विशेष बात यह है कि कुल 332 देवी-देवताओं को दशहरा समिति की ओर से औपचारिक निमंत्रण भेजे गए हैं।
कुल्लू उपायुक्त एवं अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव समिति की DC तोरूल एस. रवीश ने बताया कि कुल्लू दशहरा का महत्व केवल हिमाचल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उत्सव देश-विदेश में अपनी पहचान बना चुका है। इसे देवी-देवताओं के महाकुंभ के रूप में जाना जाता है।
हर साल दूरदराज की घाटियों से देवी-देवता अपने-अपने रथों और डोलियों के साथ इस उत्सव में शामिल होते हैं और भगवान रघुनाथ जी की शोभायात्रा में भाग लेते हैं।
उन्होंने बताया कि इस बार समिति ने आनी-निरमंड, मनाली, सैंज और बंजार घाटी के मंदिरों को भी निमंत्रण भेज दिया है।
जिला कुल्लू के राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज सभी मंदिरों को हर वर्ष की भांति इस बार भी बुलाया गया है। कुल 332 देवी-देवताओं को दशहरा समिति की ओर से औपचारिक निमंत्रण भेजे गए हैं। सभी निमंत्रण पत्र तहसीलदारों के माध्यम से मंदिर समितियों तक पहुंचाए गए हैं।
प्रशासन ने दशहरा उत्सव में पधारने वाले देवी-देवताओं के ठहरने के लिए ढालपुर मैदान और आसपास के चिन्हित स्थलों पर अस्थायी शिविर और टेंट लगाने की व्यवस्था कर दी है। साथ ही पानी, बिजली और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उत्सव समिति ने संभाल ली है। देवी-देवताओं के आगमन पर उन्हें सरकार द्वारा निर्धारित नियमों के अनुसार नजराना भी भेंट किया जाएगा।
DC तोरूल एस. रवीश ने बताया कि पिछले वर्ष 315 देवी-देवता इस महाकुंभ में शामिल हुए थे। इस बार 332 देवताओं को निमंत्रण भेजे जाने से अधिक संख्या में देवसमागम होने की संभावना है। इससे न केवल धार्मिक महत्व बढ़ेगा बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों को भी हिमाचल की अनूठी देव परंपरा देखने का अवसर मिलेगा।
हर बार की तरह इस बार भी भगवान रघुनाथ जी सात दिन तक ढालपुर मैदान में अस्थायी शिविर में विराजमान रहेंगे। यही शिविर पूरे दशहरा उत्सव का केंद्र बिंदु होगा, जहां से सभी धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक गतिविधियां संचालित होंगी।