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November 3, 2025
हिमाचल में अब फेल नहीं होंगे 10वीं-12वीं के छात्र ! HP Board की नई पॉलिसी को मिली मंजूरी
शिक्षा बोर्ड अब साल में दो बार लेगी परीक्षा
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धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड एक नई पॉलिसी लागू करने जा रहा है। इस पॉलिसी का लाभ प्रदेश के स्कूलों में पढ़ने वाले 10वीं और 12वीं के छात्रों को मिलेगा। यानी प्रदेश के 10वीं और 12वीं के छात्रों के लिए शिक्षा बोर्ड एक बड़ी राहत लेकर आया है। अगले सत्र से हिमाचल स्कूल शिक्षा बोर्ड अपने 10वीं और 12वीं के छात्रों को मार्च परीक्षाओं में फेल नहीं करेगा।
अब 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों को फेल नहीं किया जाएगा। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने विद्यार्थियों पर पढ़ाई का दबाव कम करने और उन्हें दूसरा मौका देने के लिए एक नई इम्प्रूवमेंट पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। इस पॉलिसी को सरकार और शिक्षा सचिव से हरी झंडी मिल चुकी है और इसे अगले शैक्षणिक सत्र से लागू करने की तैयारी है।
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नई व्यवस्था के तहत अब एचपी बोर्ड साल में दो बार परीक्षा आयोजित करेगा। पहली परीक्षा मार्च में और दूसरी जुलाई में सुधार परीक्षा के रूप में होगी। मार्च में जो विद्यार्थी किसी विषय में असफल होंगे या अपने अंकों से संतुष्ट नहीं होंगे, उन्हें जुलाई में दोबारा परीक्षा देने का अवसर मिलेगा। बोर्ड अधिकारियों के अनुसार यह कदम न केवल छात्रों को फेल होने से बचाएगा बल्कि उन्हें अपने अंकों में सुधार करने का भी मौका देगा।
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इस नई नीति का सबसे अहम पहलू यह है कि अब किसी भी छात्र को फेल या कंपार्टमेंट घोषित नहीं किया जाएगा। यदि कोई छात्र मार्च की परीक्षा में असफल होता है, तो उसे सीधे अगली कक्षा में प्रमोट कर दिया जाएगा और जुलाई में पूरक परीक्षा देकर वह अपनी स्थिति सुधार सकता है। अगर छात्र जुलाई की परीक्षा में सफल हो जाता है, तो उसकी शिक्षा बिना किसी बाधा के आगे बढ़ेगी, अन्यथा उसे पूर्व कक्षा में पढ़ाई दोबारा करनी होगी।
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शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह नीति छात्रों में परीक्षा के भय और असफलता के तनाव को कम करेगी। कई बार एक विषय में असफलता पूरे वर्ष की मेहनत पर पानी फेर देती थी, लेकिन अब छात्र जानेंगे कि उनके पास एक और मौका है। यह नीति विशेष रूप से ग्रामीण और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों के लिए लाभकारी मानी जा रही है, जिन पर बोर्ड परीक्षा का दबाव सबसे अधिक रहता है।
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हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष डॉ राजेश शर्मा ने बताया कि बोर्ड ने इम्प्रूवमेंट पॉलिसी को सरकार के पास भेजा था और अब उसे मंजूरी मिल गई है। हमारी कोशिश है कि इसे अगले शैक्षणिक सत्र से लागू किया जाए। नई नीति विद्यार्थियों को बेहतर प्रदर्शन का मौका देगी और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगी। उन्होंने कहा कि बोर्ड इस नीति के लिए परीक्षा शेड्यूल] मूल्यांकन प्रणाली और स्कूलों को दिशा-निर्देश जारी करने की प्रक्रिया में है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप है, जिसमें शिक्षा को “कम भय और अधिक अवसर आधारित” बनाने की बात कही गई है। हिमाचल बोर्ड का यह प्रयास देश के अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल पॉलिसी साबित हो सकता है।