#विविध
February 13, 2025
अकेले शिमला की प्यास बुझाएगी सुक्खू सरकार ? गुस्साई भीड़ ने SDM को घेरा
काम-धंधा छोड़कर 20 दिन से सिर्फ पानी ढो रहे हैं ठियोग वासी
शेयर करें:

शिमला। हिमाचल प्रदेश में सूखे के कदम पड़ चुके हैं, लेकिन परिवर्तनवादी सुक्खू सरकार का फोकस शिमला शहर की प्यास बुझाने पर है। वहीं, शिमला जिले के ठियोग में बीते 15 दिन से लोग बाइक, कार जैसे तमाम साधनों से बीते 20 दिन से पानी ही ढो रहे हैं। आम जनता की कई चेतावनियों को कूड़े में डालने का नतीजा गुरुवार को यह रहा कि गुस्साई भीड़ ने ठियोग के SDM को घेर लिया। खबर लिखे जाने तक भीड़ SDM दफ्तर के बाहर धरने पर बैठी है।
ठियोग संघर्ष समिति के पदाधिकारी महेंद्र वर्मा ने बताया कि अपना कामकाज छोड़कर पानी ढोने के काम में लगे लोगों ने जिला प्रशासन को कई मौकों पर जल प्रदाय व्यवस्था सुधारने और आम जनता को जीवन की सबसे बुनियादी सुविधा, यानी पानी उपलब्ध कराने की मांग की। लेकिन प्रशासन और जल शक्ति विभाग ने इस पर ध्यान नहीं दिया। दोपहर 12 बजे गुस्साए लोगों ने SDM के दफ्तर को घेर लिया।
लोग जल शक्ति विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। लेकिन उनकी मांग सुनने को खुद जलशक्ति विभाग के अफसर ही मौजूद नहीं थे। शिमला जिले की कई पंचायतों में लोग प्यासे हैं। लोगों में गुस्सा इसलिए भी उमड़ा, क्योंकि जिले में 1 करोड़ से ज्यादा का पेयजल घोटाला हुआ है। सुक्खू सरकार अभी घोटाले की जांच ही कर रही है, लेकिन अभी तक इस मामले में किसी भी अफसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की गई है।
इस साल जून से शिमला के लोगों को चौबीसों घंटे पानी मिलेगा। इसके लिए सुक्खू सरकार सतलुज नदी से पानी ढोकर लाएगी। तैयारियां हो चुकी हैं और सरकार अपनी पीठ ठोकती दिख रही है। वहीं, प्रदेश के रामपुर बुशहर में लोगों को सात दिन में एक बार पानी मिल रहा है, जबकि दलाश पंचायत के पांच गांवों में बिना पानी के हाहाकार मचा हुआ है।
यही हाल सोलन के धर्मपुर और कांगड़ा जिले के मैक्लोडगंज का भी है। मैक्लोडगंज में तो पानी की कमी के कारण टूरिस्ट होटल छोड़कर भाग रहे हैं। बिलासपुर जिले के घुमारवीं के सभी वार्डों में हफ्तेभर से पानी की किल्लत है। लेकिन, जलशक्ति विभाग का पूरा जोर शिमला की प्यास बुझाने में लगा हुआ है, जो कि समझ से परे है।