#विविध

August 29, 2026

सुक्खू सरकार फिर लेने जा रही 700 करोड़ का लोन, 1.10 लाख करोड़ के पास पहुंचा कर्ज का पहाड़

सुक्खू सरकार 7.56 फीसदी ब्याज दर पर 13 साल के लिए ले रही लोन

शेयर करें:

himachal govt loan

शिमला। आर्थिक दबाव से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश के लिए कर्ज का बोझ एक बार फिर बढ़ने जा रहा है। सुक्खू सरकार राज्य की खराब अर्थव्यवस्था के पहिये को एक बार फिर कर्ज के सहारे धक्का देने की तैयारी में है। प्रदेश सरकार ने 700 करोड़ रुपये का नया लोन लेने की अधिसूचना जारी कर दी है। इसके साथ ही हिमाचल के कर्ज का पहाड़ और ऊंचा होने जा रहा है।

 

राज्य के वित्त विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक यह कर्ज 13 साल की अवधि के लिए लिया जाएगा और इस पर 7.56 फीसदी ब्याज देना होगा। सरकार के खजाने में यह रकम सितंबर के पहले सप्ताह में पहुंचने की उम्मीद है। नए कर्ज के बाद प्रदेश के कुल कर्ज का आंकड़ा करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के आसपास पहुंचने की स्थिति में होगा।

700 करोड़ के लिए 1 सितंबर को होगी नीलामी

वित्त विभाग के प्रधान सचिव देवेश कुमार की ओर से कर्ज लेने के आशय की अधिसूचना जारी की गई है। अधिसूचना की तारीख 27 अगस्त है, जबकि इसे शनिवार 29 अगस्त को गजट में प्रकाशित किया गया। केंद्र सरकार से आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद अब 700 करोड़ रुपये जुटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। इसके लिए 1 सितंबर को ऑक्शन होगी और निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद 2 सितंबर को यह रकम राज्य सरकार के खजाने में आने की उम्मीद है। सरकार ने अधिसूचना में इस कर्ज को राज्य के विकास कार्यों के लिए लेने की बात कही है।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचली युवाओं के लिए सरकारी नौकरी का मौका: डाक विभाग में निकली बंपर भर्ती, जानें डिटेल

700 करोड़ के साथ ब्याज का भी बढ़ेगा बोझ

सरकार को यह रकम भले ही तत्काल आर्थिक जरूरतों और विकास कार्यों के लिए उपलब्ध हो जाएगी, लेकिन इसके साथ भविष्य की देनदारी भी बढ़ेगी। 700 करोड़ रुपये के इस कर्ज पर 7.56 फीसदी वार्षिक ब्याज निर्धारित है। इस हिसाब से सरकार को सालभर में करीब 52.92 करोड़ रुपये केवल ब्याज के रूप में चुकाने होंगे, जबकि मूलधन की अदायगी अलग होगी।  कर्ज की अवधि 13 साल होने के कारण आने वाले वर्षों में राज्य के बजट पर इसका वित्तीय असर बना रहेगा। ब्याज का भुगतान साल में दो बार किया जाएगा।

पहले से एक लाख करोड़ से ज्यादा का कर्ज

हिमाचल प्रदेश पर पहले ही एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज बताया जा रहा है। ऐसे में 700 करोड़ रुपये का नया कर्ज प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर चल रही बहस को और तेज कर सकता है। नया लोन मिलने के बाद सरकार की कुल कर्ज देनदारी करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के आंकड़े के करीब पहुंचने की स्थिति में होगी। यही वजह है कि विपक्ष सरकार पर लगातार बढ़ते कर्ज को लेकर निशाना साधता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने कर्ज लेने के पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए हैं।

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: दो परिवारों पर टूटा कहर, सोने-चांदी के गहनों सहित नगदी भी हो गई राख; पहने कपड़े ही बचे

कर्मचारियों के लंबित वित्तीय लाभ के बीच नया कर्ज

एक तरफ सरकार विकास कार्यों के लिए धन जुटाने के लिए नया कर्ज लेने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ कर्मचारी और पेंशनर अपने लंबित वित्तीय लाभों का इंतजार कर रहे हैं। राज्य कर्मचारियों का करीब 15 फीसदी महंगाई भत्ता लंबित बताया जा रहा है। इसके अलावा वेतन आयोग से जुड़े एरियर की देनदारियां भी सरकार पर हैं। कर्मचारी वर्ग को उम्मीद है कि सरकार दीपावली से पहले डीए की कुछ किस्तों का भुगतान कर सकती है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि 700 करोड़ रुपये का नया कर्ज आने के बाद क्या सरकार कर्मचारियों के लंबित वित्तीय लाभों के लिए भी कोई बड़ा फैसला लेगी?

 

यह भी पढ़ें : हिमाचल: मां के साथ पार्क में सैर करने निकली युवती के साथ मनचले युवक ने कर दी नीच हरकत

सुक्खू सरकार बोली- केंद्र से मदद घटने का पड़ा असर

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू राज्य की वित्तीय स्थिति को लेकर पहले भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते रहे हैं। उनका कहना है कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट समाप्त होने के बाद प्रदेश की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ा है। सरकार का तर्क है कि सीमित राजस्व संसाधनों के बीच विकास कार्यों और राज्य की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए उपलब्ध वित्तीय विकल्पों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। वहीं विपक्ष इसे सरकार की वित्तीय नीतियों का परिणाम बता रहा है।

नोट : ऐसी ही तेज़, सटीक और ज़मीनी खबरों से जुड़े रहने के लिए इस लिंक पर क्लिक कर हमारे फेसबुक पेज को फॉलो करें

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख