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February 17, 2026

हिमाचल में मरीजों की जेब पर बोझ! सरकारी हॉस्पिटल में जांच कराना हुआ महंगा, जनता नाखुश

टेस्ट करवाने के लिए नई फीस लागू

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Government Hospital

सिरमौर। हिमाचल प्रदेश में इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों का रुख करने वाले मरीजों के लिए एक अहम बदलाव सामने आया है। अब तक जहां लोग कम खर्च में जांच और उपचार की सुविधा मिलने की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते थे, वहीं अब उन्हें कुछ जांचों के लिए पहले से ज्यादा भुगतान करना पड़ेगा।

टेस्ट करवाने के लिए नई फीस लागू

जिला सिरमौर के सबसे बड़े स्वास्थ्य संस्थान डॉ. वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल नाहन में विभिन्न  डायग्नोस्टिक टेस्ट की नई फीस लागू कर दी है,  जिससे आम मरीजों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। हालांकि प्रबंधन का दावा है कि यह फैसला सुविधाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए लिया गया है। 

 

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क्यों बढ़ाई गई जांच की फीस?

अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मशीनों की देखभाल, स्टाफ की सेवाएं, उपकरणों की मरम्मत और बाकी कामकाज के खर्च धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। इन खर्चों को संभालने के लिए मरीजों से लिए जाने वाले चार्ज में थोड़ा बदलाव करना जरूरी समझा गया।

आम जनता में मिला जुली राय देखने की मिला 

अधिकारियों का कहना है कि सरकारी अस्पताल होने के बावजूद आधुनिक सुविधाएं देने के लिए संसाधनों की जरूरत होती है, इसलिए यह कदम उठाया गया है। हालांकि आम जनता में इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है।

 

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किन जांचों के लिए देनी होगी कितनी फीस?

अब अस्पताल में कुल 9 तरह की जांचों के लिए तय शुल्क लिया जाएगा। नई दरें इस प्रकार हैं-

  • ईसीजी – 50 रुपये
  • यूएसजी (अल्ट्रासाउंड) – 200 रुपये
  • ईको स्पेशलाइज्ड यूएसजी – 400 रुपये
  • वीडियो ईईजी – 600 रुपये
  • एनसीवी – 600 रुपये
  • ईएमजी – 600 रुपये
  • वीईपी – 550 रुपये
  • बीईआरए – 250 रुपये
  • ट्रेमर एनालिसिस – 500 रुपये

 

कुछ लोगों का कहना है किनिजी अस्पतालों की तुलना में ये दरें अभी भी काफी कम हैं, लेकिन सरकारी अस्पताल में इलाज की उम्मीद लेकर आने वाले कुछ मरीजों को यह बढ़ोतरी भारी लग सकती है।

लोगों की क्या प्रतिक्रिया है?

कुछ लोगों का मानना है कि अगर इन पैसों से अस्पताल में सुविधाएं बेहतर होती हैं और मशीनें अच्छी तरह काम करती हैं, तो थोड़ी-बहुत बढ़ोतरी स्वीकार की जा सकती है। वहीं दूसरी ओर, सीमित आय वाले परिवारों का कहना है कि छोटी-छोटी जांचों के लिए भी अगर बार-बार पैसे देने पड़ें, तो कुल मिलाकर खर्च बढ़ जाता है, जो गरीब परिवारों के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।

 

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प्रशासन ने क्या कहा?

अस्पताल के कार्यवाहक MS डॉ. रिशम सिंह ने बताया कि नई दरें रोगी कल्याण समिति की स्वीकृति के बाद पारदर्शी प्रक्रिया के तहत लागू की गई हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि आर्थिक रूप से कमजोर और गंभीर मरीजों को पूरी राहत दी जाएगी, ताकि किसी भी मरीज का इलाज पैसे की वजह से न रुके।

किन मरीजों को मिलेगी पूरी छूट?

अस्पताल प्रबंधन ने स्पष्ट किया है कि कुछ श्रेणियों के मरीजों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। इनमें शामिल हैं-

  • कैंसर मरीज
  • एचआईवी मरीज
  • भर्ती कोविड मरीज
  • बीपीएल परिवार
  • आयुष्मान भारत और हिमकेयर योजना के लाभार्थी
  • जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के मरीज
  • अज्ञात या लावारिस व्यक्ति
  • दुर्घटना के 24 घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचने वाले मरीज
  • एमएलसी केस वाले मरीज

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कुल मिलाकर क्या बदला?

सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा अब भी निजी अस्पतालों से सस्ती है, लेकिन पहले की तुलना में आम मरीजों को थोड़ा ज्यादा खर्च करना पड़ेगा। प्रशासन का दावा है कि यह कदम सुविधाओं को बेहतर बनाए रखने के लिए जरूरी है, जबकि आम लोगों की नजर इस बात पर रहेगी कि बढ़ी हुई फीस के बदले उन्हें बेहतर सेवाएं मिलती हैं या नहीं।

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