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August 30, 2025
हिमाचल में आपदा से ढही सड़कें, अरबों का सेब मंडियों तक नहीं पहुंचा : गोदामों में सड़ रहा
गोदामों में सड़ने लगे हैं सेब
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कुल्लू। हिमाचल प्रदेश में बीते तीन महीनों से मानसून की बारिश ने सेब उत्पादकों की कमर तोड़ दी है। कुल्लू-मनाली और ऊझी घाटी के अधिकांश बागवानों की हालत खराब है क्योंकि उनकी तैयार फसल या तो बगीचों में अटकी हुई है या गोदामों में खराब हो रही है। अनुमान है कि इस आपदा से एक अरब रुपये से अधिक की कीमत का सेब संकट में फंस गया है।
जानकारी के अनुसार, बीते कुछ दिनों से लगातार बारिश के कारण पिछले पंद्रह दिनों से तुड़ान पूरी तरह से ठप पड़ा है। मनाली और आसपास के ग्रामीण इलाकों में करीब 85 प्रतिशत फसल अभी भी पेड़ों पर लटकी है।
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वहीं, जो सेब पहले ही तोड़ा जा चुका है, वह गोदामों में सड़ने लगा है। खेतों में फलों की चमक खोती जा रही है और बाजार तक नहीं पहुंच पाने की वजह से किसानों की मेहनत पर पानी फिरता दिखाई दे रहा है।
कुल्लू जिला हिमाचल प्रदेश का प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्र माना जाता है। यहां हर साल डेढ़ लाख मीट्रिक टन से अधिक सेब का उत्पादन होता है। गाला, किंग राट, रॉयल डिलीशियस और हनी क्रिस्प जैसी विदेशी किस्मों के लिए यह इलाका खासा प्रसिद्ध है।
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लेकिन सड़कें बंद होने से इन किस्मों का समय पर विपणन असंभव हो गया है। मनाली का सेब सामान्यतः आलूग्राउंड और पतलीकूहल की मंडियों में जाता है, मगर आलूग्राउंड का इलाका बाढ़ में तबाह हो चुका है और पतलीकूहल मंडी भी बंद पड़ी है।
स्थानीय बागवान चुन्नी लाल ठाकुर बताते हैं कि उनका पूरा सेब गोदाम में पड़ा-पड़ा खराब हो रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सड़कें नहीं खुलीं तो किसानों को भारी आर्थिक संकट झेलना पड़ेगा। फल उत्पादक मंडल के अध्यक्ष प्रेम शर्मा का भी कहना है कि निचले इलाकों में करीब 70 से 75 प्रतिशत फसल और ऊपरी इलाकों में 85 प्रतिशत से अधिक उत्पादन अभी भी बगीचों में ही फंसा हुआ है।
उधर, एसडीएम मनाली रमण कुमार शर्मा का कहना है कि प्रशासन सड़क बहाली के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है। वामतट मार्ग, बाहणु पुल और मनाली-लेह हाईवे सहित अन्य सड़कों को खोलने का प्रयास किया जा रहा है ताकि किसानों की नकदी फसल को जल्द मंडियों तक पहुंचाया जा सके।