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June 26, 2026
हिमाचल के खाली खजाने को भरेगा यह जल विद्युत प्रोजेक्ट, हर साल देगा ₹200 करोड़ की संजीवनी
उहल- 3 परियोजना से 13 % रॉयल्टी भी मिलेगी
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मंडी। आर्थिक संकट और तंगहाली के दौर से गुजर रहे हिमाचल प्रदेश के लिए आखिरकार ऊर्जा क्षेत्र से एक बेहद राहत भरी और बड़ी खुशखबरी सामने आई है। वित्तीय संकट से जूझ रहे प्रदेश के खाली खजाने को भरने में अब राज्य की जलविद्युत परियोजनाएं संकटमोचक की भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। इसी कड़ी में मंडी जिला के जोगिंदर नगर में स्थापित उहल चरण-3 जलविद्युत परियोजना (Uhl Stage-III Hydroelectric Project) अब पूरी क्षमता के साथ धरातल पर उतर चुकी है।
लंबे समय तक तकनीकी खामियों और बजटीय कमियों से जूझने के बाद अब यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट प्रदेश के राजस्व को बढ़ाने का सबसे बड़ा जरिया बनने जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस परियोजना से प्रदेश सरकार को हर साल लगभग 200 करोड़ रुपये की बंपर आय होगी, जिससे आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रही सुक्खू सरकार को बहुत बड़ा सहारा मिलेगा।
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तकनीकी बाधाओं को पार करने के बाद उहल चरण-3 परियोजना ने बिजली उत्पादन के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं। परियोजना से अब तक कुल मिलाकर लगभग 465 मिलियन यूनिट स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन किया जा चुका है। आंकड़ों पर नजर डालें तो:
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इस ठप पड़े प्रोजेक्ट को दोबारा सुचारू रूप से पैरों पर खड़ा करने के लिए सरकार और प्रबंधन ने वित्तीय इंजीनियरिंग का सहारा लिया। इसके तहत ₹185 करोड़ का विशेष ऋण (Loan) उपलब्ध कराया गया, जिससे रुकी हुई मरम्मत और बहाली के कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा किया गया। राहत की बात यह भी रही कि इस लोन पर ब्याज दरों में कटौती करवाने में सफलता मिली, जिससे परियोजना को ब्याज के मद में ही हर साल लगभग 30 करोड़ रुपये की सीधी बचत होने का अनुमान है।
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नियमित बिजली उत्पादन और लगातार मिल रहे राजस्व के कारण अब परियोजना के सिर से कर्ज का बोझ भी कम होने लगा है। मूलधन और ब्याज चुकाने की प्रक्रिया सुचारू रूप से शुरू हो चुकी है, जिससे इस पावर प्रोजेक्ट की वित्तीय स्थिति बेहद मजबूत हो गई है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इस परियोजना से होने वाली कुल आय का 13 प्रतिशत मुफ्त बिजली (रॉयल्टी) के रूप में हिमाचल प्रदेश सरकार के खाते में जाएगा। इससे सीधे तौर पर राज्य सरकार को हर साल 25 से 30 करोड़ रुपये की अतिरिक्त शुद्ध आय होगी, जिसका इस्तेमाल सूबे में चल रहे विभिन्न विकासात्मक और जनकल्याणकारी कार्यों के लिए किया जा सकेगा।
परियोजना प्रबंधन के उच्च अधिकारियों के अनुसार, पिछले साल उत्पादन का आंकड़ा तय लक्ष्य से थोड़ा कम रहने का एक बड़ा तकनीकी कारण था। दरअसल, ऊपरी क्षेत्र में स्थित ऐतिहासिक शानन जलविद्युत परियोजना लगभग एक महीने तक रखरखाव के कारण बंद रही थी। शानन प्रोजेक्ट के बंद होने से उहल परियोजना के लिए आवश्यक पानी की उपलब्धता नहीं हो सकी, जिससे टरबाइन पूरी क्षमता से नहीं घूम पाए। हालांकि, अब इस समस्या को पूरी तरह सुलझा लिया गया है और उत्पादन ग्राफ में लगातार सुधार दर्ज किया जा रहा है।
उहल चरण-3 परियोजना केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने वाला एक बड़ा आधार भी बन रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलविद्युत क्षेत्र में इस तरह की सफल परियोजनाएं हिमाचल प्रदेश को आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि आने वाले समय में उहल चरण-3 परियोजना से मिलने वाला राजस्व विकास योजनाओं के लिए नई ऊर्जा साबित होगा और आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हिमाचल को वित्तीय मजबूती प्रदान करेगा।