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July 31, 2025
हिमाचल में बारिश से तबाही: रामपुर में बादल फटा, नदी-नालों का जलस्तर बढ़ा- सहमे लोग
मनाली में रातभर डर का माहौल, ब्यास और नेहरू कुंड में बढ़ा जलस्तर
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार बारिश का दौर जारी है। कई जिलों में रात भर बारिश ने खूब तबाही मचाई है। वहीं, लोगों का ऐसी बारिश में घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। मौसम विभाग के अनुसार अभी और कई दिनों तक बारिश और बाढ़ प्रदेश को सताएगी।
शिमला जिले की रामपुर उपमंडल की कूट पंचायत में सोमवार रात बादल फटने की घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया। घटना में किसी प्रकार के जानी नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन एक पुल और बिजली के कई पोल बह गए हैं। तेज बहाव के कारण स्थानीय लोगों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी।
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लगातार बारिश के कारण मंडी के पंडोह क्षेत्र में चंडीगढ़-मनाली फोरलेन एक बार फिर मलबा आने से बंद हो गया है। इसके चलते दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। फोरलेन खुलने का इंतजार कर रहे यात्रियों में निराशा है।
मनाली में सोमवार रात को तेज बारिश के कारण नेहरू कुंड का जलस्तर इतना बढ़ गया कि पानी पुल तक पहुंच गया। लोग पूरी रात डर के साये में जागते रहे। ब्यास नदी का जलस्तर भी आसपास के इलाकों में खतरे की सीमा के करीब पहुंच गया था, हालांकि सुबह बारिश थमने के बाद जलस्तर में थोड़ी गिरावट आई है।
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मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार, 29 जुलाई से सक्रिय मानसून अब थोड़ा कमजोर पड़ सकता है। फिर भी 3 अगस्त तक राज्य में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना बनी रहेगी। शिमला, कांगड़ा, कुल्लू और मंडी जिलों में आज भी येलो अलर्ट जारी है।
1 अगस्त: शिमला, सोलन, सिरमौर
2 अगस्त: ऊना, बिलासपुर, शिमला, सोलन, सिरमौर
3 अगस्त: ऊना, बिलासपुर, हमीरपुर, चंबा, सिरमौर
इस बार मानसून ने कई जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश दी है:
शिमला: 71% अधिक
मंडी: 61%
हमीरपुर: 40%
बिलासपुर: 27%
कुल्लू और सिरमौर: 26%
ऊना: 22%
वहीं, लाहौल-स्पीति में 70% और चंबा में 17% कम बारिश दर्ज हुई है।
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20 जून से अब तक प्रदेश में 170 लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें से 30 की मौत बादल फटने, बाढ़ और भूस्खलन जैसी प्राकृतिक आपदाओं से हुई है। 36 लोग अब भी लापता हैं। भारी बारिश से 1599 करोड़ रुपये की संपत्ति नष्ट हो चुकी है।
बीते तीन दिनों की बारिश के कारण 289 सड़कें और 346 बिजली ट्रांसफॉर्मर बंद हैं। अब जब मानसून थोड़ा कमजोर हुआ है, तो राहत एवं पुनर्बहाली के कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।