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February 1, 2026

केंद्रीय बजट से हिमाचल निराश: बढ़ेंगी सुक्खू सरकार की मुश्किलें; जानें क्या मिला और किसकी थी उम्मीद

सीएम सुक्खू ने रखे थे चार मुख्य मुद्दे, अब प्रदेश पर बढ़ेगा आर्थिक संकट

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Center budget about himachal

शिमला। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026 पेश किया। इस बजट को लेकर हिमाचल प्रदेश में खासा उत्साह और उम्मीदें थीं। प्राकृतिक आपदाओं, बढ़ते कर्ज और सीमित संसाधनों से जूझ रहे प्रदेश को केंद्र से बड़ी आर्थिक राहत की आस थी, लेकिन बजट सामने आने के बाद यह साफ हो गया कि हिमाचल के हिस्से उम्मीदों से कहीं कम आया है।

 

बजट में कुछ घोषणाएं जरूर की गईं, लेकिन जिन अहम मुद्दों पर राज्य सरकार राहत चाह रही थी, उन पर केंद्र की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। तो आईए जानते हैं कि केंद्रीय बजट में हिमाचल को क्या मिला और क्या नहीं मिला

केंद्रीय बजट से हिमाचल क्या क्या मिला

केंद्रीय बजट में हिमाचल के लिए पहली बड़ी घोषणा माउंटेन ट्रेल्स को लेकर की गई। इसके तहत प्रदेश के पर्वतीय और वन क्षेत्रों में ट्रेल्स विकसित किए जाएंगे, जहां ट्रेकिंग, माउंटेन बाइकिंग और अन्य एडवेंचर गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। सरकार का मानना है कि इससे पर्यटन को नया आयाम मिलेगा।

 

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  • दूसरी घोषणा के तहत अखरोट और पाइन नट्स जैसी उच्च मूल्य वाली मेवों की साइंटिफिक खेती को प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे किसानों की आय बढ़ने की उम्मीद जताई गई है।
  • तीसरी घोषणा पर्यटन से जुड़ी है, जिसमें प्रमुख टूरिस्ट डेस्टिनेशन पर हजारों टूर गाइड्स को प्रोफेशनल ट्रेनिंग दी जाएगी। यह 12 हफ्तों का हाइब्रिड कोर्स होगा, जिसे IIM के सहयोग से संचालित किया जाएगा।
  • चौथी घोषणा हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को मजबूत करने से जुड़ी है। इसके तहत नेशनल काउंसिल फॉर होटल मैनेजमेंट को अपग्रेड कर नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी बनाया जाएगा, जिससे युवाओं को स्किल और रोजगार दोनों मिल सकें।
  • वहीं, पांचवीं राहत के रूप में केंद्रीय करों में हिमाचल की हिस्सेदारी 0.830 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.217 प्रतिशत कर दी गई है, जिससे राज्य को करीब 13,949.97 करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है।

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केंद्रीय बजट से किन बातों में मिली निराशा

पूरे बजट का विश्लेषण किया जाए तो जोड़.घटाकर यही पांच घोषणाएं हैं, जिन्हें हिमाचल के खाते में गया माना जा रहा है। इसके उलट, जिन मुद्दों को लेकर प्रदेश सरकार ने केंद्र से बड़ी राहत की मांग की थी, वे पूरी तरह अनसुने रह गए। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बजट से पहले केंद्रीय वित्त मंत्री के समक्ष चार प्रमुख मुद्दे रखे थे।

 

  • इनमें सबसे अहम था आपदा प्रभावित हिमाचल के लिए अतिरिक्त बजट और अलग डिजास्टर रिस्क इंडेक्स की मांग। सुक्खू सरकार का तर्क था कि पहाड़ी राज्यों में बार.बार आने वाली बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं से भारी नुकसान होता है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था में ऐसे राज्यों को अपेक्षित सहायता नहीं मिल पाती।
  • दूसरी बड़ी मांग थी ग्रीन फंड की। हिमाचल का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र में आता है और पर्यावरण संरक्षण की जिम्मेदारी राज्य पर है। सरकार चाहती थी कि एक अलग ग्रीन फंड बनाया जाए, जिससे पर्यावरण अनुकूल और ग्रीन हिल डेवलपमेंट परियोजनाओं को वित्तीय सहायता मिल सके। इसके अलावा राज्य ने लोन लिमिट बढ़ाने और रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट को जारी रखने की भी मांग की थी।

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  • हालांकि बजट 2026 में इन चारों मुद्दों पर हिमाचल सरकार को कोई राहत नहीं मिली। उल्टा, 16वें वित्तायोग ने हिमाचल समेत छोटे राज्यों को आरडीजी ग्रांट देने की सिफारिश नहीं की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे हिमाचल को करीब 40 हजार करोड़ रुपये का नुकसान होने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर आने वाले समय में प्रदेश की आर्थिक स्थिति, विकास कार्यों और सामाजिक योजनाओं पर पड़ेगा।

कुल मिलाकर केंद्रीय बजट 2026 हिमाचल प्रदेश के लिए कुछ सीमित घोषणाओं तक सिमटता नजर आया है, जबकि राज्य जिन बड़ी राहतों की उम्मीद कर रहा था, वे अधूरी रह गईं। इससे साफ है कि केंद्र के इस बजट ने हिमाचल की उम्मीदों को मजबूती देने के बजाय निराशा और चिंता को और गहरा कर दिया है।

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प्रदेश में बढ़ेगी आर्थिक मुश्किलें

केंद्रीय बजट उम्मीदों पर खरा ना उतरने के चलते अब आने वाले दिनों में हिमाचल प्रदेश पर आर्थिक संकट और गहरा जाएगा। प्रदेश के सीमित संसाधनों से होनी वाली आय से प्रदेश के विकास के रथ का पहिया दौड़ाना मुश्किल हो जाएगा। इतना ही नहीं कर्मचारियों और पेंशनरों को वेतन और पेंशन देने की भी एक बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी। जिसके चलते एक बार फिर प्रदेश कर्ज के पहाड़ के नीचे दबता चला जाएगा।

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