#विविध
December 16, 2025
सुक्खू सरकार का व्यवस्था परिवर्तन: अब राशन डिपो में घरेलू उत्पाद भी मिलेंगे - वह भी डिस्काउंट पर
आटा-चावल, आटा, चावल के साथ साथ डिस्काउंट पर बेचेगी घरेलू उत्पाद
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शिमला। हिमाचल प्रदेश की सत्ता संभालने के बाद से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में चल रही कांग्रेस सरकार लगातार व्यवस्था परिवर्तन का नारा देती रही है। सुक्खू सरकार ने समय समय पर कई ऐसे फैसले भी लिए हैं, जो जनता के लिए खासकर निर्धन परिवारों के लिए लाभदायक रहे हैं।
अब सुक्खू सरकार ऐसा ही एक और बड़ा और एतिहासिक फैसला लिया है। सुक्खू सरकार के व्यवस्था परिवर्तन की दिशा में सस्ते राशन डिपुओं का दायरा अब और व्यापक होने जा रहा है। प्रदेशवासियों को अब सिर्फ आटा, चावल और दाल ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा के घरेलू उपयोग का जरूरी सामान भी सस्ते दामों पर एक ही छत के नीचे मिलेगा।
दरअसल प्रदेश सरकार उपभोक्ताओं की सहूलियत बढ़ाने के लिए डिपुओं में नियंत्रित राशन के साथ-साथ नॉन-कंट्रोल घरेलू उत्पादों की बिक्री को बढ़ावा देने जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत अब राशन डिपुओं में आटा, चावल, दाल और चीनी के अलावा खाद्य तेल, मसाले, विभिन्न प्रकार की दालें, टूथपेस्ट और अन्य आवश्यक उपभोक्ता वस्तुएं भी उपलब्ध होंगी।
सरकार की इस नई पहल से एक ओर जहां आम जनता को रोजमर्रा का जरूरी सामान सस्ते दामों पर नजदीक ही मिलेगा, वहीं दूसरी ओर डिपो संचालकों की आमदनी भी बढ़ेगी। सुक्खू सरकार का यह कदम सस्ते राशन डिपुओं को केवल वितरण केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी जरूरतों का भरोसेमंद उपभोक्ता केंद्र बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक राम कुमार गौतम ने सोमवार को शिमला में प्रदेशभर के डिपो संचालकों और जिला नियंत्रकों के साथ संयुक्त बैठक की। बैठक का उद्देश्य डिपुओं में नॉन.कंट्रोल आइटम्स की बिक्री, संचालन से जुड़ी व्यावहारिक समस्याओं और जमीनी चुनौतियों पर चर्चा करना रहा। निदेशक ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जिला स्तर पर डिपो संचालकों की समस्याओं का समयबद्ध समाधान किया जाए, क्योंकि डिपो संचालक ही सरकार और उपभोक्ताओं के बीच सबसे अहम कड़ी हैं।
विभाग ने सुझाव दिया कि डिपो संचालक राशन के साथ अन्य घरेलू उत्पाद भी बेचें, जिस पर उन्हें कमीशन दिया जाएगा। इस पर डिपो संचालक समिति ने सहमति जताई, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी संचालक पर अतिरिक्त सामान बेचने की बाध्यता न डाली जाए। उनका कहना था कि जहां मांग होगी, वहां वे स्वयं नॉन.कंट्रोल आइटम्स की बिक्री करेंगे।
बैठक में डिपो संचालक समिति ने अपनी पुरानी मांगें एक बार फिर मजबूती से रखीं। संचालकों ने हजारों डिपो संचालकों के लिए वन टाइम लाइसेंस की सुविधा देने की मांग की, ताकि हर साल 800 रुपये का शुल्क न देना पड़े। इसके साथ ही कांग्रेस के घोषणा पत्र के अनुरूप डिपो संचालकों को 20 हजार रुपये मासिक वेतन देने के वादे को पूरा करने की मांग भी उठाई गई।
डिपो संचालकों ने बताया कि कई डिपुओं में वर्षों पुरानी 2जी पीओएस मशीनें लगी हैंए जिनमें इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहद कमजोर रहती है। 5जी के दौर में इन मशीनों से राशन वितरण प्रभावित हो रहा है। संचालकों ने विभाग से नई पीओएस मशीनेंए बेहतर सिम या वाई.फाई सुविधा उपलब्ध कराने की मांग कीए ताकि वितरण व्यवस्था सुचारू रह सके।
सरकार की इस नई पहल से एक ओर जहां आम जनता को रोजमर्रा का जरूरी सामान सस्ते दामों पर नजदीक ही मिलेगा, वहीं दूसरी ओर डिपो संचालकों की आमदनी भी बढ़ेगी। सुक्खू सरकार का यह कदम सस्ते राशन डिपुओं को केवल वितरण केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण और शहरी जरूरतों का भरोसेमंद उपभोक्ता केंद्र बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।