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February 15, 2026

हिमाचल: 10वीं के छात्रों को राहत, साल में दो बार दे सकेंगे परीक्षा; मार्कशीट में जुड़ेंगे अधिकतम अंक

मार्च में परीक्षा के बाद मई और जून में दोबारा दे सकेंगे परीक्षा

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HP Board Exam

धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों के लिए इस साल की सबसे बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने 10वीं कक्षा के छात्रों के लिए परीक्षा प्रणाली में अहम बदलाव करते हुए नई व्यवस्था लागू की है। अब छात्र एक ही शैक्षणिक सत्र में दो बार परीक्षा दे सकेंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि दोनों बार परीक्षा देने के बाद जो सर्वाधिक अंक होंगे, वहीं मार्कशीट में अंकित किए जाएंगे।

छात्रों में खत्म होगा परीक्षा का तनाव

अब तक 10वीं की बोर्ड परीक्षा को लेकर छात्रों पर भारी मानसिक दबाव रहता था। एक ही परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करने की मजबूरी, भविष्य की चिंता और प्रतिशत को लेकर तनाव आम बात थी। लेकिन नई ड्यूल परीक्षा प्रणाली से यह दबाव काफी हद तक कम हो जाएगा। बोर्ड के अनुसार मुख्य परीक्षा मार्च में आयोजित होगी। जो विद्यार्थी अपने परिणाम से संतुष्ट नहीं होंगे या किसी कारणवश अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाएंगे, वे मई.जून में आयोजित दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकेंगे।

 

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कम अंक आने का डर भी दूर

छात्रों और अभिभावकों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही था कि यदि दूसरी परीक्षा में अंक कम आए तो क्या होगा। जिस पर बोर्ड ने इसे पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि दोनों प्रयासों में से जिस परीक्षा में अधिक अंक प्राप्त होंगे, वही अंतिम माने जाएंगे। यदि छात्र दूसरी बार कम अंक लाता है, तो पहली परीक्षा के बेहतर अंक ही मार्कशीट में दर्ज होंगे। यानी सुधार परीक्षा देना अब पूरी तरह सुरक्षित विकल्प होगा,  इसमें किसी तरह का जोखिम नहीं रहेगा।

 

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प्रतिशत बढ़ाने का सुनहरा अवसर

नई व्यवस्था से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिशतता बढ़ाने का वास्तविक अवसर मिलेगा। कई बार बीमारी, पारिवारिक परिस्थितियां या मानसिक तनाव के कारण छात्र अपनी क्षमता के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाते। अब वे परिणाम देखकर अपनी कमजोरियों को समझ सकेंगे और दूसरी परीक्षा में बेहतर तैयारी के साथ बैठ सकेंगे। यह बदलाव उन विद्यार्थियों के लिए खास तौर पर फायदेमंद होगा जो मेरिट सूची या प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए अधिक प्रतिशत हासिल करना चाहते हैं।

 

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आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा दोनों मजबूत

बोर्ड का मानना है कि यह प्रणाली न केवल छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ाएगी, बल्कि मेरिट सूची को भी अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धात्मक बनाएगी। अब अंतिम परिणाम छात्रों के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पर आधारित होगा, न कि एक दिन की परीक्षा पर। शिक्षा विशेषज्ञों का भी कहना है कि यह कदम विद्यार्थियों को मानसिक रूप से मजबूत बनाएगा और परीक्षा को जीवन.मरण का सवाल मानने की प्रवृत्ति कम करेगा।

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