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July 6, 2025

हिमाचल में बादल फटने से मची तबाही : 75 लोगों ने गंवाया जीवन, रेड अलर्ट पर तीन जिले

बाढ़ औऱ लैंडस्लाइड से 700 करोड़ से ज्यादा का हुआ नुकसान

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Himachal Cloud Burst

शिमला। हिमाचल प्रदेश में मानसून इस बार कहर बनकर बरस रहा है। राज्य में 20 जून से 4 जुलाई 2025 तक के बीच हुई भारी बारिश और इससे जुड़े हादसों में अब तक 75 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 288 से अधिक लोग घायल हुए हैं। बारिश व बादल फटने से जुड़ी इन त्रासदियों ने न केवल मानव जीवन, बल्कि राज्य की बुनियादी संरचनाओं, कृषि और पशुपालन क्षेत्र को भी गहरा नुकसान पहुंचाया है।

75 लोगों की मौत

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) द्वारा जारी रिपोर्ट के मुताबिक, 45 लोगों की मौतें सीधी तौर पर बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और पानी में बहने जैसी घटनाओं से हुई हैं। वहीं 30 अन्य मौतें सड़क हादसे, बिजली का करंट लगने और गैस सिलेंडर विस्फोट जैसे कारणों से हुईं।

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फिसलन और लैंडस्लाइड से बढ़ा खतरा

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि सड़क दुर्घटनाओं में चंबा जिले में सबसे ज्यादा 6 मौतें, जबकि कुल्लू में 3 मौतें हुई हैं। यह आंकड़ा इस बात का संकेत है कि मानसून के दौरान पहाड़ी सड़कों पर फिसलन और लैंडस्लाइड के खतरे किस कदर जानलेवा हो जाते हैं।

10,168 पशु-पक्षियों की मौत

प्राकृतिक आपदा का असर पशुधन और पोल्ट्री फार्मिंग पर भी पड़ा है। अब तक 10,000 से अधिक पोल्ट्री पक्षी और 168 मवेशी मारे जा चुके हैं। इससे ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में आजीविका पर संकट और गहराया है, जहां लोग मुख्यतः कृषि और पशुपालन पर निर्भर हैं।

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कृषि-बागवानी को भारी नुकसान

हजारों हेक्टेयर भूमि पर फैली फसलें और बागवानी क्षेत्र भी भारी नुकसान की चपेट में आए हैं। सेब, मटर और अन्य मौसमी फसलों की बर्बादी की सूचनाएं विभिन्न जिलों से लगातार आ रही हैं। हालांकि, इस नुकसान का सटीक आकलन फिलहाल जारी है।

700 करोड़ से अधिक का नुकसान

मुख्यमंत्री ने शिमला सचिवालय में पत्रकारों से बात करते हुए बताया कि राज्य में आपदा के कारण अब तक 700 करोड़ रुपये से अधिक का आर्थिक नुकसान हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार राहत और पुनर्वास के कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर कर रही है।

सरकार ने घोषित की अनुग्रह राशि

मृतकों के परिजनों के लिए राज्य सरकार ने अनुग्रह राशि की घोषणा की है। इसके साथ ही प्रभावित जिलों में राहत शिविर, खाद्य सामग्री, प्राथमिक चिकित्सा और अस्थायी आवास की व्यवस्था की जा रही है।

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भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में सतर्कता

भारी बारिश के चलते भूस्खलन की आशंका वाले क्षेत्रों में विशेष चेतावनी जारी की गई है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से आग्रह किया है कि वे सतर्क रहें और जिला प्रशासन द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों का पालन करें। आपातकालीन सेवाओं को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

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3 जिलों में रेड अलर्ट

 विदित रहे कि, बीती रात से प्रदेश के कई हिस्सों में मूसलधार बारिश हो रही है, जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस बीच मौसम विभाग ने आज के लिए तीन जिलों में भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग ने कांगड़ा, मंडी और सिरमौर जिलों के लिए बहुत भारी बारिश का रेड अलर्ट जारी किया है। इन क्षेत्रों में दोपहर बाद और देर रात भारी से अति भारी वर्षा की संभावना जताई गई है। इस चेतावनी को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी सतर्कता के साथ अलर्ट मोड में है और लोगों से अपील की जा रही है कि वे निचले इलाकों या नदी-नालों के किनारे जाने से बचें।

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