#विविध

December 20, 2025

हिमाचल में मौजूद है महाभारत काल का शंख, 7 कपाट खुलने के बाद होते हैं भगवान विष्णु के दर्शन

मूर्ति ने रोकी थी लाखों की मुगल सेना

शेयर करें:

Himachal Devi Devta

सोलन। हिमाचल में महाभारत काल से जुड़े कई किस्से और कहानियां हैं। वर्षों से हम इनके बारे में सुनते आ रहे हैं। इसी कड़ी में सोलन जिले में एक ऐसा मंदिर है जो महाभारत काल से संबंध रखता है। इस मंदिर से जुड़ी बातें हैरान करने वाली हैं।

भगवान श्री चतुर्भुज विष्णु जी का मंदिर

सोलन शहर से 12 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ये मंदिर भगवान श्री चतुर्भुज विष्णु जी का है। मंदिर को विष्णु मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। यहां आपको मिलेगा पाञ्चजन्य शंख जो श्रीकृष्ण से संबंध रखता है। यहां आपको मिलेगा पंचमुखी शिवलिंग जो प्रदेश में अपनी तरह का सिर्फ एक है। 

यह भी पढ़ें: हिमाचल के इस मंदिर में है पांडवों के समय का बेलन- यहां मुराद पूरी होने पर चढ़ाते हैं बच्चों के बाल

बघाट की सीमा तक नहीं छू पाए मुगल

इस मंदिर का संबंध सिर्फ महाभारत काल से नहीं बल्कि मुगल काल से भी है। इस मंदिर में मूर्ति की स्थापना के बाद मुगलिया सल्तनत के सिपाही बघाट रियासत की सीमाओं को छू भी नहीं पाए थे। बताया जाता है कि बघाट रियासत के राजाओं ने मुगलों के डर से जौणाजी को अपनी राजधानी बनाया।

600 साल पहले हुई मूर्ति की स्थापना

मंदिर में स्थापित भगवान श्री कृष्ण की चतुर्भुज मूर्ति प्रथम शताब्दी की है। मान्यता है कि इस मूर्ति की स्थापना 600 साल पहले की गई थी। मुगलों के डर से इस मूर्ति को समुद्र में छिपा दिया गया। बाद में बघाट रियासत के राजा जामवंत को सपने में मूर्ति को जौणाजी में स्थापित करने का आदेश हुआ। 

यह भी पढ़ें: हिमाचल का रहस्यमय मंदिर: पीछे से शिव-पार्वती के दर्शन पर मनाही, हो जाती है मौ*त

क्षेत्र पर कब्जा नहीं कर पाए थे मुगल

भगवान विष्णु की मूर्ति की स्थापना के बाद मुगल कभी भी इस क्षेत्र पर कब्जा नहीं कर पाए। आज तक ये ज्ञात नहीं कि आखिर इस मूर्ति में क्या शक्ति थी जिसने लाखों की मुगल सेना को यहां आने से रोक दिया। कहते हैं मंदिर में 7 द्वार खुलने के बाद ही भगवान श्री चतुर्भुज विष्णु जी के दर्शन होते हैं। 

महाभारत में श्रीकृष्ण ने बजाया शंख

वहीं बात करें इस मंदिर की सबसे खास चीज की तो यहां पर है- पाञ्चजन्य शंख जिससे एक साथ पांच ध्वनियां निकलती हैं। कहते हैं कि महाभारत युद्ध के दौरान भगवान श्रीकृष्ण ने इसे बजाया था। इसका वर्णन श्रीमद्भागवत गीता के प्रथम अध्याय में भी मिलता है।

यह भी पढ़ें: देवता चालदा महासू के आगे चलता है न्याय का प्रतीक- पश्मी पहुंचे 70 बकरे, गांववासी करेंगे सेवा

खुद से प्रकट हुआ पंचमुखी शिवलिंग

वहीं आखिर में बात करें पंचमुखी शिवलिंग की तो इसे किसी मूर्तिकार ने नहीं बनाया बल्कि ये धरती से खुद प्रकट हुआ है। मान्यता अनुसार ये 1200 साल पुराना है। ये इसलिए और खास हो जाता है क्योंकि हिमाचल में सिर्फ एक ऐसा पंचमुखी शिवलिंग है।

ट्रेंडिंग न्यूज़
LAUGH CLUB
संबंधित आलेख