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December 31, 2025
हिमाचल : पंचायत चुनावों से पहले बड़ा फेरबदल- नया रोस्टर होगा जारी, बदलेंगी कई सीटें
आरक्षण व्यवस्था में संतुलन बनाने का प्रयास
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज चुनावों को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राज्य सरकार पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव के लिए नया रोस्टर लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके तहत पंचायतों, पंचायत समितियों और जिला परिषदों का पुनर्गठन व पुनर्सीमांकन किया जा रहा है, जिससे वार्डों की सीमाएं नए सिरे से तय होंगी।
पहले सरकार ने वर्ष 2011 की जनगणना को आधार बनाकर रोस्टेशन के अनुसार पंचायतीराज चुनाव कराने का निर्णय लिया था, लेकिन अब परिसीमन और पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू होने के कारण नया रोस्टर लागू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर प्रतिनिधित्व को अधिक संतुलित और व्यावहारिक बनाना बताया जा रहा है।
प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं का मौजूदा कार्यकाल जनवरी 2026 में समाप्त हो रहा है। ऐसे में चुनावी प्रक्रिया पूरी होने तक पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति की जाएगी। इसके साथ ही प्रदेश में नई पंचायतों के गठन की भी तैयारी है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में प्रशासनिक ढांचा और मजबूत किया जा सके।
पुनर्सीमांकन के बाद कई जिला परिषद वार्डों का आकार घटेगा तो कई का विस्तार भी होगा। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश में कुल 3,577 पंचायतें हैं। सरकार के अनुसार लगभग 500 पंचायतों में वार्डों की मतदाता सूचियां नए सिरे से तैयार करनी होंगी। इस प्रक्रिया के साथ-साथ विभागीय स्तर पर चुनाव की अन्य तैयारियां भी तेज कर दी गई हैं।
सरकार को यह भी शिकायतें मिली हैं कि कुछ पंचायतों में लगातार महिलाओं के लिए ही सीटें आरक्षित चली आ रही हैं। ऐसे मामलों की समीक्षा भी नए रोस्टर के तहत की जा रही है, ताकि आरक्षण व्यवस्था में संतुलन बनाया जा सके और सभी वर्गों को समान अवसर मिलें।
इसी कड़ी में सरकार ने जिला परिषद के निर्वाचन क्षेत्रों का परिसीमन भी नए सिरे से कराने के निर्देश दिए हैं। उच्च न्यायालय में विचाराधीन देवेंद्र सिंह नेगी बनाम हिमाचल प्रदेश व अन्य मामले में आए फैसले के अनुरूप वार्डों के परिसीमन से संबंधित पहले जारी की गई सभी अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया गया है।
अब पूरी प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों के अनुसार दोबारा शुरू की जाएगी। सरकार का मानना है कि नए रोस्टर और परिसीमन के बाद पंचायतीराज चुनाव अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत तरीके से कराए जा सकेंगे।