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February 28, 2026

हिमाचल में महंगाई का डबल झटका- सरकार बढ़ाने जा रही बिजली की दरें, इस महीने से होगी लागू

मार्च में तय होंगी नई दरें, 1 अप्रैल से लागू होने की संभावना

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electricity tariff

शिमला। हिमाचल प्रदेश में अगले वित्तीय वर्ष से बिजली उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। राज्य बिजली बोर्ड ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखते हुए साफ किया है कि बढ़ती बिजली खरीद लागत के चलते राजस्व अंतर को पाटना जरूरी हो गया है। अब जहां एक ओर बिजली की दरें बढ़ सकती है, वहीं हाल ही में सरकार ने शराब के दामों में भी बढ़ोतरी की थी। सरकारी डिपो पर मिलने वाला आटे का कोटा भी जहां कम मिलेगा, वहीं बिजली की दरों में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। 

बोर्ड की दलील: खर्च बढ़ा, राजस्व कम

शुक्रवार को हुई प्रस्तुति में राज्य बिजली बोर्ड ने आयोग के सामने पक्ष रखा कि प्रदेश में पूरे साल निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बाहरी स्रोतों से बिजली खरीदनी पड़ती है। हाल के समय में इस खरीद का खर्च बढ़ा है, जिससे बोर्ड की वित्तीय स्थिति पर दबाव पड़ा है। बोर्ड का कहना है कि यदि खर्च और आय के बीच के अंतर को संतुलित करना है तो दरों में संशोधन जरूरी है।

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25 पैसे तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव

बिजली बोर्ड ने अधिकतम 25 पैसे प्रति यूनिट तक दर बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। हालांकि न्यूनतम बढ़ोतरी 10 पैसे प्रति यूनिट रखी गई है। अंतिम निर्णय नियामक आयोग द्वारा सभी पक्षों को सुनने के बाद लिया जाएगा।

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सुनवाई में कई पक्ष शामिल

इस दौरान राज्य बिजली बोर्ड, राज्य पावर कॉरपोरेशन, राज्य ट्रांसमिशन कॉरपोरेशन के अलावा शिमला होटल एसोसिएशन सहित अन्य संस्थाओं ने भी आयोग के समक्ष अपनी-अपनी दलीलें रखीं।

मार्च में तय होंगी नई दरें

बोर्ड ने आगामी वित्तीय वर्ष के लिए आयोग में याचिका दायर की हुई है। परंपरा के अनुसार मार्च के अंत तक आयोग नई दरों की घोषणा करता है और उन्हें 1 अप्रैल से लागू किया जाता है। अभी तक शिमला, धर्मशाला और बद्दी में तीन चरणों में जनसुनवाई हो चुकी है।

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इक्विटी बिजली पर बदला फैसला

हिमाचल को सतलुज जल विद्युत निगम से 26 प्रतिशत इक्विटी के रूप में निशुल्क बिजली मिलती थी। अब राज्य सरकार ने इसे सीधे बोर्ड को देने के बजाय बेचने का निर्णय लिया है। इससे सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिलेगा, लेकिन बिजली खरीद का कुल खर्च बढ़ने की आशंका भी जताई जा रही है। अब अंतिम फैसला नियामक आयोग को करना है, जिससे तय होगा कि नए वित्तीय वर्ष में उपभोक्ताओं को कितनी अतिरिक्त राशि चुकानी पड़ेगी। अब आम जनता इसे बोझ मान रही है और सरकार से उम्मीद लगाए बैठी है कि जनता को राहत देने वाला फैसला लिया जाएगा। 

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