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November 23, 2025
हिमाचल : आज घर पहुंचेगी शहीद की पार्थिव देह, पिछले दो दिन से परिवार का रो-रो कर बुरा हाल
मां-बाप के इकलौते सहारे थे नमन
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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश का एक और लाल देश की सेवा करते हुए वीरगति को प्राप्त हो गया। भारतीय वायुसेना का स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस दुबई एयर शो के के अंतिम दिन हवाई प्रदर्शन करते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दर्दनाक हादसे में हिमाचल का विंग कमांडर नमन स्याल शहीद हो गया।
नमन स्याल कांगड़ा जिला के नगरोटा बगवां के पटियालकड़ गांव के रहने वाले थे। 37 वर्षीय नमन अपने परिवार का इकलौता सहारा थे। उनकी शहादत की खबर मिलते ही पूरे गांव में मातम छा गया है और परिजन गहरे सदमे में हैं।
नमांश स्याल महज 19 साल की उम्र में एयरफोर्स में भर्ती हो गए थे। 2014 में उनकी शादी हुई थी। उनकी पत्नी अफसाना (अफशां) भी भारतीय वायुसेना में तैनात हैं। नमन स्याल और अफसाना की एक 7 साल की बेटी भी है, जिसके सिर से अब हमेशा के लिए पिता का साया उठ गया है। नमन स्याल अपने माता पिता के इकलौते बेटे थे। नमन की मौत से पूरे परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

नमन के माता-पिता पिछले पांच माह से सैलूर में रह रहे थे और वहां से ही दुबई एयर शो में बेटे की भागीदारी की खबरें सुन रहे थे। लेकिन शुक्रवार को आई यह दुखद सूचना उनकी दुनिया हिला गई। बताया जा रहा है कि नमन की पत्नी और बेटी आज हिमाचल पहुंचेंगी। वृद्ध माता-पिता बेटे की पार्थिव देह का इंतजार करते हुए बेसुध हालत में हैं।
परिवार के ताया जोगिंद्र नाथ ने बताया कि पार्थिव शरीर आज या कल सैलूर से रवाना होगा और दोपहर करीब दो बजे कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट पर लाया जाएगा। अंतिम संस्कार पैतृक गांव के पास दुरूह खड्ड स्थित श्मशानघाट में सैन्य सम्मान के साथ किया जाएगा। उन्होंने बताया कि, नमांश स्याल की तैनाती कोयम्बटूर के पास एयरबेस सैलूर में थी। नमांश की पत्नी की IIM कोलकाता में ट्रेनिंग चल रही है, जिसके चलते वह पिछले 6 महीने से वहीं रह रही हैं।
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नमन स्याल बचपन से ही देश सेवा के लिए प्रतिबद्ध थे। महज 19 साल की उम्र में भारतीय वायुसेना में भर्ती होकर उन्होंने अपने सपनों को पंख दिए। वे हमीरपुर के सुजानपुर स्थित सैनिक स्कूल के उज्ज्वल छात्र रहे। उनका पालन-पोषण एक सैन्य परिवार में हुआ। पिता जगन्नाथ स्वयं एयरफोर्स से रिटायर होने के बाद स्कूल में प्रधानाचार्य के पद से सेवानिवृत्त हुए। मां वीना देवी एक गृहणी हैं।
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नमन की शहादत की खबर जैसे ही पटियालकड़ गांव पहुंची, पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। गांव की गलियों में सन्नाटा है। हर तरफ उदासी और गम की लकीरें दिखाई देती हैं। रिश्तेदार और ग्रामीण परिजनों को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं, परंतु परिवार का गहरा दर्द शब्दों से कहीं बड़ा है। परिवार के साथ साथ पूरा गांव अब अपने जवान की पार्थिव देह का इंतजार कर रही है।
विंग कमांडर नमन स्याल की असमय शहादत से भारतीय वायुसेना को एक होनहार पायलट का नुकसान हुआ है। वहीं उनका परिवार ऐसे स्तंभ से वंचित हो गया हैए जो उनका भविष्य और सहारा था। एक मासूम बेटी का बचपन अब पिता की यादों के सहारे कटेगा। एक पत्नी का जीवन अपने सहचर की स्मृतियों के सहारे गुजरेगा और वृद्ध माता.पिता को अब बेटे की पार्थिव देह का इंतजार ही शेष रह गया है।