हिमाचल : हिमाचल प्रदेश सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि समूचे विश्व में अपने खान-पान, रहन-सहन और संस्कृति के लिए काफी ज्यादा प्रसिद्ध है। हिमाचल की इसी सांस्कृतिक परंपरा का एक हिस्सा है 'धाम'। वैसे हिमाचल के हर जिले में धाम बनाई जाती है, लेकिन हर जिले में इस धाम का कलेवर बदल सा जाता है।
12 हजार लोगों के लिए बनी धाम
इसी तरह अपने अनूठे स्वाद के लिए प्रसिद्द मंडयाली धाम का भी कोई सानी नहीं है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मंडयाली धाम के मुरीद हैं। मगर बीते कल से ही मंडी जिले में आयोजित एक शादी में बनी धाम की चर्चा हर तरफ हो रही है। खबर के अनुसार मंडी जिले के जाहू में आयोजित हुई इस शादी में पूरे 12 हजार लोगों के लिए धाम बनाई गई।
98 चरोटियों का हुआ इस्तेमाल, पकाए 3 क्विंटल चावल
इस धाम को बनाने के लिए 35 बोट्टी (रेसोइये) बुलाए गए थे। जिन्होंने 98 चरोटियों (बर्तन) में आठ घंटे मेहनत कर इस धाम को तैयार किया। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर भी इस शादी में पहुंचे थे और उन्होंने भी इस धाम का लुत्फ़ उठाया। इस धाम के आयोजन में पूरे 3 क्विंटल चावल के साथ अन्य कई सारे पकवान तैयार किए गए।
स्थानीय लोगों द्वारा बताया गया कि आधी रात से ही धाम बनाने की तैयारियां शुरू हो गई थी। वहीं, इस धाम को बनाने आए 35 बोट्टी (रेसोइये) ने पारंपरिक विधि से इस पूरा खाना तैयार किया।
जानें, मंडयाली धाम की खासियत
आपको बता दें कि मंडयाली धाम में सबसे पहले बूंदी मीठा या बदाणा परोसा जाता है, जो इसे चंबा, काँगड़ा और बाकि ज़िलों की धाम से अलग बनता है। इसके आलावा मंडयाली धाम में सेपू बड़ी, कद्दू का खट्टा, कोल का खट्टा, दाल और झोल भी परोसा जाता है। इस पूरे भोज को टौर के हरे पत्तों से बनी पत्तलों पर परोसा जाता है, जिससे इसकी फ़ूड वैल्यू बढ़ जाती है।
आपको बता दें कि धाम हिमाचल प्रदेश का एक पारंपरिक भोज है, जिसे मुख्यतः शादियों, त्योहारों, उत्सवों, समारोहों के अवसर पर ही बनाया जाता है। माना जाता है कि मंडयाली धाम की शुरुआत आज से करीब 1,000 साल से भी पहले चंबा घाटी में हुई थी।