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August 21, 2026
हिमाचल के स्कूलों में पिलाया जाएगा फिल्टर और उबला पानी, 47 बच्चे बीमार पड़ने पर जागा शिक्षा विभाग
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूलों को जारी किए आदेश
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू के एक सरकारी स्कूल में मिड-डे मील की खीर खाने के बाद बच्चों की तबीयत बिगड़ने की घटना ने अब पूरे प्रदेश के स्कूलों में पेयजल व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मानसून के बीच जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए शिक्षा विभाग ने सभी सरकारी स्कूलों के लिए विशेष एहतियाती निर्देश जारी किए हैं।
स्कूल शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी उपनिदेशकों, प्रधानाचार्यों और मुख्याध्यापकों को स्कूलों में सुरक्षित पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि विद्यार्थियों को केवल सुरक्षित, फिल्टर या उबला हुआ पानी ही उपलब्ध कराया जाए।
शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि जिन स्कूलों में RO या वाटर प्यूरीफायर खराब पड़े हैं, उनकी तत्काल मरम्मत करवाई जाए। जरूरत होने पर स्कूल निधि का इस्तेमाल कर नए उपकरण भी लगाए जा सकते हैं।
विभाग ने यह भी कहा है कि जहां फिलहाल सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था नहीं है, वहां विद्यार्थियों को घर से उबला हुआ पानी लाने की सलाह दी जाए। मानसून के दौरान दूषित पानी से होने वाली बीमारियों को देखते हुए स्कूलों में साफ-सफाई और पानी की गुणवत्ता पर विशेष नजर रखने को कहा गया है।
शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष कोहली के अनुसार, 18 अगस्त को कुल्लू के जीपीएस बाड़ी स्कूल में मिड-डे मील के तहत बच्चों को खीर परोसी गई थी। इसे खाने के बाद कई विद्यार्थियों की तबीयत बिगड़ गई थी।
घटना के बाद बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया था। स्वास्थ्य में सुधार के बाद कई बच्चों को अस्पताल से छुट्टी भी दी गई। मामले की जांच शुरू की गई और प्रारंभिक जांच में दूषित पानी को बच्चों की तबीयत खराब होने की संभावित वजह माना गया।
शिक्षा विभाग ने सभी स्कूल प्रमुखों को मानसून के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा है। स्कूलों में पीने के पानी के स्रोत, टंकियों, फिल्टर और प्यूरीफायर की स्थिति की जांच करने के साथ स्वच्छता व्यवस्था पर भी ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं।
विभाग का मानना है कि बारिश के मौसम में पानी के दूषित होने की आशंका बढ़ जाती है। ऐसे में स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले पानी की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है।
कुल्लू की घटना के बाद जारी इन निर्देशों का मकसद प्रदेशभर के सरकारी स्कूलों में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा होने से रोकना है। शिक्षा विभाग ने स्कूल प्रबंधन को किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतने के निर्देश दिए हैं।