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February 14, 2026
हिमाचल HC के फैसलों से सुप्रीम कोर्ट नाखुश : बोला- चुनी सरकार को काम क्यों नहीं करने दे रहे
भविष्य में गंभीरता से लिया जाएगा अनावश्यक हस्तक्षेप
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नई दिल्ली/शिमला। हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय और पंचायत चुनावों को लेकर चल रही कानूनी खींचतान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक बेहद सख्त और महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने हिमाचल हाईकोर्ट के बार-बार के हस्तक्षेप पर नाराजगी जताते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि "चुनी हुई सरकार को उसका काम करने दीजिए।"
दरअसल सुप्रीम कोर्ट को ये महसूस हुआ कि हाईकोर्ट राज्य सरकार के प्रशासनिक फैसलों में बार-बार दखल दे रहा है। CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने मौखिक रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में इस तरह के अनावश्यक हस्तक्षेप को गंभीरता से लिया जाएगा। कोर्ट ने माना कि संविधान के तहत समय पर चुनाव कराना अनिवार्य है लेकिन सरकार की प्रशासनिक लॉजिस्टिक्स और प्रक्रियाओं का सम्मान करना भी जरूरी है।
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हिमाचल सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने दलील दी कि राज्य में वार्डों के पुनर्सीमांकन (Delimitation) का काम जारी है और 1 मई से देशभर में जनगणना का काम भी शुरू होना है। सरकार का तर्क था कि इन भारी-भरकम प्रक्रियाओं के बीच तुरंत चुनाव कराना मुश्किल है।
हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि "डिलिमिटेशन की प्रक्रिया का लंबित होना, चुनावों को अनिश्चितकाल के लिए टालने का वैध आधार नहीं हो सकता।" कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस तर्क को सही माना कि संवैधानिक संस्थाओं के चुनाव समय पर होने ही चाहिए।
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सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की व्यावहारिक दिक्कतों (जैसे सर्दियों में दूरदराज के इलाकों में आवाजाही) को समझते हुए हाईकोर्ट द्वारा तय 30 अप्रैल की समय सीमा को एक महीने बढ़ाकर 31 मई कर दिया है।
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हिमाचल प्रदेश में लोकतंत्र की बुनियादी इकाइयों का भविष्य इस फैसले पर टिका है। प्रदेश में करीब:
इनमें से अधिकांश का कार्यकाल समाप्त हो चुका है। अब इस फैसले के बाद राज्य निर्वाचन आयोग को युद्ध स्तर पर तैयारियां शुरू करनी होंगी ताकि जून की शुरुआत से पहले प्रदेश को नई चुनी हुई पंचायतें और निकाय मिल सकें।