#विविध
November 21, 2025
हिमाचल चुनाव आयोग ने 9 अधिकारियों को दी राहत, गलती मानने पर रद्द किया निलंबन
अधिकारियों की माफी के बाद चुनाव आयोग की नरमी
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शिमला। हिमाचल प्रदेश में मतदाता सूची के प्रारूप को लेकर बरती गई लापरवाही पर कार्रवाई के बाद अब राज्य निर्वाचन आयोग ने नरमी दिखाते हुए सस्पेंड किए गए सभी 9 अधिकारियों का निलंबन रद्द कर दिया है। इन अधिकारियों ने आयोग के समक्ष अपनी गलती स्वीकार की और लिखित रूप में माफी भी मांगी, जिसके बाद आयोग ने उन्हें राहत देने का निर्णय लिया।
दरअसल, मंडी और चंबा जिलों की कुछ पंचायतों में राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची का 2025 का ड्राफ्ट रोल ग्राम सभा की बैठक में रखने के निर्देश दिए थे। लेकिन जांच में खुलासा हुआ कि संबंधित अधिकारियों ने नया ड्राफ्ट प्रस्तुत करने के बजाय 2022 का पुराना प्रारूप ही ग्राम सभा में रख दिया। यह स्पष्ट तौर पर आयोग के निर्देशों की अवहेलना थी।
इस लापरवाही के चलते आयोग ने तत्काल सख़्त कार्रवाई करते हुए 7 पंचायत सचिव, 1 पंचायत निरीक्षक, 1 पंचायत उप-निरीक्षक को सस्पेंड कर दिया था। साथ ही, संबंधित जिला पंचायत अधिकारी के कार्यालय में रिपोर्ट करने के आदेश दिए गए थे।
इसके अलावा, BDO निहरी और BDO भरमौर को भी कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, क्योंकि उनके क्षेत्र में ही यह लापरवाही सामने आई थी। अब आयोग ने दोनों अधिकारियों के नोटिस भी वापस लेते हुए केवल चेतावनी देकर छोड़ दिया है, ताकि भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न हो।
हर बार फाइनल मतदाता सूची तैयार करने से पहले ड्राफ्ट रोल ग्राम सभा में रखा जाता है, ताकि गलत नामों को हटाया जा सके, मृत व्यक्तियों के नाम हटाए जाएं, गलत वार्ड में गए नाम सुधारे जाएं और नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़े जा सकें। जब आयोग ने डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की तो पाया गया कि अधिकारी नया अपडेटेड प्रारूप तैयार करने के बजाय पुरानी 2022 की लिस्ट को ही ग्राम सभा के सामने रख रहे थे। इसी तकनीकी और प्रशासनिक लापरवाही पर यह कार्रवाई हुई थी।
मामले की जांच के दौरान निलंबित अधिकारियों ने आयोग से माफी मांगते हुए कहा कि गलती अनजाने में हुई थी और आगे से पूरी सतर्कता बरतेंगे। इसके बाद आयोग ने सभी 9 अधिकारियों का निलंबन तत्काल प्रभाव से रद्द, दोनों BDO से जारी नोटिस वापस और दोनों को भविष्य में अधिक सतर्क रहने की चेतावनी दी।
राज्य निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया की बुनियाद है, और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही आयोग ने सभी जिलों को निर्देश जारी किए हैं कि आगे से इस प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता और सावधानी बरती जाए।