#विविध
November 21, 2025
हिमाचल : 28 साल पति से दूर रही महिला, चल बसा दूसरा आदमी; अब पहले से मांग रही खर्चा-पानी
2016 में वापस गांव लौटी महिला- पहले पति ने मांग रही गुजारा बत्ता
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बिलासपुर। हिमाचल प्रदेश में कई महिलाएं व पुरुष ऐसे हैं- जिन्होंने दूसरी शादी की हुई है। कई मामले प्रदेश की अदालतों में लंबित पड़े हुए हैं। ऐसे ही एक मामले में बिलासपुर स्थित फैमिली कोर्ट ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण और मिसाल पेश करने वाला फैसला सुनाया है।
कोर्ट ने उस महिला की भरण-पोषण याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसने अपने पहले पति से 20 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता मांगा था। अदालत ने अपने स्पष्ट निर्णय में कहा कि धारा 125(4) CRPC के तहत वह पत्नी, जो लंबे समय तक व्यभिचार में रहकर किसी अन्य पुरुष के साथ पत्नी के रूप में जीवन व्यतीत करती रही हो, उसे पहले पति से भरण-पोषण प्राप्त करने का अधिकार नहीं है।
मामले के अनुसार महिला लगभग 28 वर्ष पहले अपने पति को छोड़कर पंजाब के कपूरथला जिले के गांव संगोजला चली गई थी। यहां वह एक साधु, जरनैल सिंह के साथ रहने लगी और अपना नाम बदलकर ‘लक्ष्मी’ रख लिया। दस्तावेजों और गवाहों से यह साबित हुआ कि वह वहां जरनैल सिंह की पत्नी के रूप में रहती थी।
जरनैल सिंह की मृत्यु के बाद महिला ने उसकी संपत्ति भी अपने नाम करवा ली। लेकिन कुछ समय बाद वहां उत्पन्न विवाद और कथित धमकियों के चलते 2016 में महिला ने वापस अपने पहले पति को संदेश भिजवाया। पंचायत और रिश्तेदारों के साथ पति पंजाब गया और महिला को साथ ले आया। तब से वह उसी के साथ रह रही है।
महिला ने अदालत में दावा किया कि वह अभी भी पहले पति की कानूनी पत्नी है और एक साल से उसे कोई खर्च नहीं दिया जा रहा। उसने तर्क दिया कि पति के पास 70 बीघा जमीन है, फोरलेन परियोजना में 1.50 करोड़ रुपये मिल चुके हैं तथा रेल लाइन के लिए भी 8-9 बीघा जमीन अधिग्रहित होनी है, जिससे लगभग चार करोड़ रुपये मिलने की संभावना है। ऐसे में वह आसानी से 20 हजार रुपये प्रतिमाह गुजारा भत्ता दे सकता है।
पति की ओर से पेश किए गए जवाब ने मामले की दिशा पूरी तरह बदल दी। उन्होंने कहा कि महिला 28 साल पहले बिना वजह घर छोड़कर चली गई और पंजाब में साधु जरनैल सिंह की पत्नी बनकर रही।
अदालत में जमा किए गए दस्तावेजों में यह तथ्य प्रमाणित हुआ-
पति ने यह भी बताया कि उसने महिला को घर में दो कमरे तथा सुविधाएं उपलब्ध करवाई हुई हैं और वह 2016 से उसी के साथ रह रही है। पति ने अपने बेटे और पंचायत प्रधान को गवाह के रूप में पेश किया, जबकि महिला केवल अपने बयान के सहारे खड़ी रही और कोई स्वतंत्र गवाह नहीं लाई।
17 नवंबर 2025 को दिए फैसले में प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट ने लिखा कि धारा 125(4) सीआरपीसी स्पष्ट करती है। अगर पत्नी व्यभिचार में रहती है, तो वह भरण-पोषण की हकदार नहीं होती।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पति के पास चाहे कितना भी धन हो, यदि महिला इतने वर्षों तक किसी दूसरे पुरुष के साथ पत्नी के रूप में रही है, तो वह पहले पति से गुजारा भत्ता नहीं मांग सकती। अदालत ने यह भी माना कि महज यह तथ्य कि पति ने दूसरी शादी कर ली, इससे महिला को भी दूसरी शादी करने या व्यभिचार करने का अधिकार नहीं मिल जाता।
अदालत ने सभी साक्ष्यों, गवाहियों और दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद महिला की गुजारा भत्ता याचिका को अस्वीकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि महिला ने स्वयं स्वीकार किया कि वह 2016 से पहले पति के साथ नहीं थी और रिकॉर्ड यह साबित करता है कि वह दूसरे पुरुष की पत्नी के रूप में रहती रही है।