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August 7, 2025

हिमाचल में आपदा के लिए कौन जिम्मेदार? सुक्खू सरकार ने लिस्ट की तैयार- जानें

सुक्खू सरकार को SC में देना होगा जवाब

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Himachal Disaster

शिमला। हिमाचल प्रदेश में लगातार हो रही मूसलधार बारिश, भूस्खलन, बादल फटने और बाढ़ की घटनाओं ने इस वर्ष राज्य को भयावह प्राकृतिक आपदा के दौर से गुजारा है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अब देश की सर्वोच्च अदालत ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए प्रदेश सरकार और प्रशासनिक तंत्र से जवाब-तलब किया है।

हिमाचल में आपदा के लिए कौन जिम्मेदार?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ कहा है कि यदि विकास के नाम पर हिमालयी राज्य में अनियोजित निर्माण और प्रकृति से खिलवाड़ का सिलसिला यूं ही जारी रहा, तो हिमाचल प्रदेश का भौगोलिक व पारिस्थितिक अस्तित्व खतरे में पड़ जाएगा।

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सुप्रीम कोर्ट ने जताई सख्त नाराजगी

हालिया सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य में आई आपदाओं के लिए केवल प्राकृतिक कारणों को नहीं, बल्कि मानवजनित लापरवाही और अवैज्ञानिक विकास योजनाओं को भी जिम्मेदार ठहराया। अदालत की ओर से आई इस तीखी टिप्पणी के बाद प्रदेश सरकार हरकत में आई है।

सुक्खू सरकार को देना होगा जवाब

मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना ने राज्य के 14 प्रमुख विभागों को निर्देश दिए हैं कि वे 25 अगस्त से पहले सुप्रीम कोर्ट में विस्तृत ‘रिस्पांस नोट’ (उत्तर रिपोर्ट) तैयार कर पेश करें, जिसमें स्पष्ट किया जाए कि किस विभाग की क्या भूमिका रही और अब क्या सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।

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जिन विभागों को दिया गया जवाब देने का जिम्मा-

  • राजस्व विभाग
  • उद्योग विभाग
  • नगर एवं ग्राम नियोजन विभाग
  • शहरी विकास विभाग
  • पर्यटन विभाग
  • पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास विभाग
  • लोक निर्माण विभाग (PWD)
  • जल शक्ति विभाग
  • कृषि और बागवानी विभाग
  • राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (SDMA)
  • पर्यावरण एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी विभाग
  • आधारभूत ढांचागत विकास बोर्ड
  • राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (SPCB)
  • राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI)

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इन सभी विभागों से अपेक्षा की गई है कि वे साफ, तथ्यों पर आधारित और आत्ममंथन करने वाली रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपें। इसके साथ-साथ प्रतिदिन की प्रगति रिपोर्ट भी मुख्य सचिव को भेजनी अनिवार्य की गई है।

199 लोगों की मौत

हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन ने तबाही की नई इबारत लिख दी है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के मुताबिक-

  • कुल मौतें- 199
  • बाढ़, भूस्खलन, बादल फटने से- 108
  • सड़क हादसों में- 91
  • संपत्ति का अनुमानित नुकसान- ₹1905 करोड़ से अधिक
  • सैकड़ों सड़कें, पुल, भवन और जल स्रोत ध्वस्त
  • कई क्षेत्रों में बिजली और संचार ठप
  • डंगे गिरने, सड़कों के टूटने और चलते वाहनों पर भारी पत्थर गिरने जैसी घटनाएं आम हो गई हैं, जिससे आम जन-जीवन खतरे में पड़ गया है।

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सतर्क रहें, सुरक्षित रहें

दिल्ली से स्थिति का लगातार जायज़ा ले रहे CM सुखविंदर सिंह सुक्खू ने प्रदेशवासियों से सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि हम सभी मिलकर इस आपदा से निपटेंगे। किसी भी स्थिति से मुकाबले के लिए जिला प्रशासन और राहत टीमें पूरी तरह सतर्क और तैनात हैं।

 

जनता से अनुरोध है कि वह प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करे और सुरक्षित स्थानों पर रहें। CM ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिए हैं कि लोगों को तत्काल राहत और पुनर्वास प्रदान किया जाए, विशेषकर उन क्षेत्रों में जहाँ बाढ़ और भूस्खलन से मार्ग अवरुद्ध हो चुके हैं।

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क्या है मूल कारण?

सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें, तो हिमाचल प्रदेश में आपदा का प्रमुख कारण है-

  • बेतरतीब निर्माण
  • नदियों के किनारे होटलों व सड़कों का निर्माण
  • खनन और पहाड़ों की कटाई
  • जलवायु परिवर्तन और ग्लेशियरों का असामान्य पिघलना
  • कृषि भूमि का शहरीकरण
  • पर्यावरणीय आकलन की उपेक्षा

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