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December 19, 2025
ट्रोल होने के बाद पलटे हिमाचल पुलिस कप्तान, मीडिया संवाद पर लगाई रोक हटाई- जानें
कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में मीडिया से बात कर सकेंगे
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शिमला। हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा मीडिया से संवाद को लेकर जारी की गई नई मानक संचालन प्रक्रिया यानी SOP पर लगातार सवाल खड़े हो रहे थे। इस बीच पुलिस महानिदेशक (DGP) अशोक तिवारी ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा कि नई SOP को लेकर गलतफहमियां फैलाई जा रही हैं और इसका उद्देश्य सूचना रोकना नहीं, बल्कि संवाद को व्यवस्थित करना है।
DGP अशोक तिवारी ने स्पष्ट किया कि सब-डिवीजनल पुलिस अधिकारी (SDPO) और थाना प्रभारी (SHO) क्राइम और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में मीडिया से बात कर सकेंगे। हालांकि, इन दोनों श्रेणियों से इतर किसी अन्य विषय पर बयान देने के लिए उन्हें जिला पुलिस अधीक्षक (SP) की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
गौरतलब है कि पुलिस मुख्यालय की ओर से 17 दिसंबर को यह SOP जारी की गई थी। इसके बाद मीडिया जगत में इसको लेकर नाराजगी देखने को मिली। मीडिया कर्मियों का कहना था कि, इस SOP के जरिए सूचनाओं के प्रवाह को सीमित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मीडिया संगठनों ने कहा कि SOP में यह उल्लेख किया गया है कि क्राइम, कानून-व्यवस्था, जांच और पुलिस नीतियों से जुड़े मामलों पर केवल जिला स्तर के SP और रेंज के DIG ही मीडिया से औपचारिक रूप से बातचीत कर सकेंगे, वह भी आवश्यकता पड़ने पर पुलिस मुख्यालय की पूर्व अनुमति के बाद। SOP में यह भी कहा गया है कि SDPO और SHO किसी भी स्थिति में मीडिया को बयान, प्रतिक्रिया, इंटरव्यू या ब्रीफिंग नहीं देंगे।
इसी बात को लेकर सबसे ज्यादा विरोध सामने आया था। जिसके बाद सोशल मीडिया पर भी यह चर्चा तेज हो गई है कि अब चोरी, डकैती, लूट, सड़क दुर्घटनाओं जैसे रोजमर्रा के मामलों की पुष्टि के लिए भी पत्रकारों को SP या रेंज DIG से संपर्क करना पड़ेगा।
मीडिया कर्मियों का कहना था कि व्यवहारिक रूप से यह संभव नहीं है, क्योंकि वरिष्ठ अधिकारी अक्सर व्यस्त रहते हैं या फोन उपलब्ध नहीं होते। ऐसे में समय पर सही सूचना न मिलने से अपुष्ट खबरें फैलने का खतरा बढ़ जाएगा। इसलिए पत्रकारों ने SOP पर पुनर्विचार की मांग की, ताकि पुलिस और मीडिया के बीच समन्वय बना रहे और जनता तक सही व त्वरित जानकारी पहुंच सके।