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February 27, 2025
हिमाचल: महाशिवरात्रि के पर्व पर इस मंदिर में रचाई 32 जोड़ों ने शादी, यहां जानिए देवता से जुड़ी मान्यताएं
हर वर्ष इस मंदिर में किया जाता है भव्य विवाह समारोह का आयोजन
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मंडी। हिमाचल प्रदेश के बैला स्थित देव बनियुरी मंदिर में महाशिवरात्रि के अवसर पर भव्य विवाह समारोह आयोजित किया गया, जिसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए 32 जोड़ों ने विवाह के सात फेरे लिए। इनमें पंजाब से आए एक जोड़े ने भी अपनी शादी संपन्न की। मंदिर कमेटी के विवाह पंजीकरणकर्त्ता पुजारी निधि सिंह ने नवविवाहित जोड़ों को विवाह प्रमाण पत्र प्रदान किए।
देव बनियुरी मंदिर उन लोगों के लिए आस्था का केंद्र है, जिनकी शादी में किसी कारणवश बाधाएं आ रही हों। हिंदू शास्त्रों के अनुसार, कई बार वर-वधु की कुंडली में ग्रहों की स्थिति विवाह में रुकावटें उत्पन्न कर देती है, जिससे विवाह तय होने के बाद भी अड़चनें बनी रहती हैं।
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ऐसे में लोग देव बालाकामेश्वर बनियुरी की शरण में आते हैं, जहां बिना कुंडली मिलान के ही विवाह संपन्न होता है। माना जाता है कि देवता स्वयं वर-वधु की जोड़ी को स्वीकार कर विवाह का आशीर्वाद देते हैं। अब तक हजारों जोड़े देवता की शरण में आकर विवाह कर चुके हैं और सुखी दांपत्य जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
देव बनियुरी न केवल विवाह बाधाओं को दूर करने के लिए प्रसिद्ध हैं, बल्कि इन्हें 18 प्रकार की शारीरिक बीमारियों के नाशक के रूप में भी जाना जाता है। मंदिर के पुजारी डोला राम ठाकुर के अनुसार, पुराने समय में मंडी रियासत में एक महामारी फैल गई थी,
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जिससे कई गांव चर्म रोग की चपेट में आ गए थे। जब सभी वैद्य और झाड़-फूंक करने वाले इस महामारी को रोकने में असफल रहे तो राजा ने अपने महल में सभी देवताओं को बुलाकर इस समस्या का समाधान खोजने का प्रयास किया।
राजा ने घोषणा की कि जो देवता इस बीमारी को खत्म करने में सक्षम होंगे, उन्हें रियासत की ओर से जागीर प्रदान की जाएगी। तब देव बालाकामेश्वर बनियुरी ने इस महामारी को समाप्त करने का वचन दिया और इसे समाप्त करके राजा की रियासत को संकट से मुक्त किया। उनकी इस चमत्कारी शक्ति के कारण राजा ने उन्हें जागीर के रूप में नौ गढ़ नाचन और पांच गढ़ पंडोह की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी।
देव समाज में देव बनियुरी का स्थान बहुत ऊंचा है। इन्हें 12 कामेश्वरों में सबसे बड़ा देवता माना जाता है। साथ ही वेद और शास्त्रों में भी इन्हें उच्च शक्ति संपन्न माना गया है। इतना ही नहीं, देव बनियुरी को वर्षा के देवता के रूप में भी पूजा जाता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि देवता की कृपा से क्षेत्र में समय पर वर्षा होती है, जिससे कृषि और पर्यावरण संतुलित रहता है।
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हर वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर इस मंदिर में भव्य विवाह समारोह का आयोजन किया जाता है, जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु भाग लेने आते हैं। बिना कुंडली मिलान के विवाह संपन्न कराने की मान्यता और देवता की चमत्कारी चिकित्सा शक्तियों के कारण मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ लगातार बढ़ रही है। भक्तगण देव बनियुरी की शरण में आकर न केवल अपने विवाह की बाधाओं को दूर कर रहे हैं, बल्कि स्वास्थ्य और समृद्धि का आशीर्वाद भी प्राप्त कर रहे हैं।