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February 4, 2026

सावधान हिमाचल ! थम जाएंगे 108-102 एंबुलेंस के पहिये, 5 दिन की हड़ताल पर जा रहे कर्मी

सुक्खू सरकार और NHM की नीतियों के खिलाफ हड़ताल करेंगे एंबुलेंस कर्मी

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Himachal 102 108 Ambulance Strike Sukhu Government

शिमला। हिमाचल प्रदेश की जनता के लिए जीवन रेखा बन चुकी 108 और 102 एंबुलेंस सेवाओं के पहिये थमने वाले हैं। 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों ने सुक्खू सरकार और नेशनल हेल्थ मिशन की नीतियों के खिलाफ हड़ताल करने का फैसला लिया है।

थम जाएंगे 108-102 एंबुलेंस के पहिये

इस हड़ताल से प्रदेश की जनता को नुकसान उठाना पड़ सकता है। कर्मचारियों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर प्रदेशव्यापी हड़ताल का ऐलान कर दिया है। 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों के अनुसार, वह अब पांच दिन की हड़ताल पर जाएंगे। 

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कितने दिन चलेगी हड़ताल

आपको बता दें कि 108 और 102 एंबुलेंस कर्मचारियों की ये हड़ताल 12 फरवरी से 17 फरवरी सुबह 8 बजे तक जारी रहेगी। इस हड़ताल के चलते पूरे हिमाचल में 293 एंबुलेंस सेवाएं ठप्प रहेंगी।

मरीजों को होगी परेशानी

इस हड़ताल से मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ सकती है। एंबुलेंस कर्मचारी यूनियन (सीटू संबंधित) ने साफ कहा है कि सरकार की उपेक्षा और शोषणकारी नीतियों के चलते अब उनके पास आंदोलन के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। उनका कहना है कि NHM की ओर से उनकी लंबित मागों को नजरअंदाज किया जा रहा है। प्रशासन कंपनी के हित में काम कर रहा है।

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क्या कहते हैं यूनियन नेता?

वहीं  एंबुलेंस कर्मचारियों की हड़ताल पर सुक्खू सरकार द्वारा जारी किए एस्मा पर कांट्रेक्ट वर्कर यूनियन के महासचिव बालकराम ने कहा कि यूनियन ने हड़ताल का फैसला लिया है और वह उस पर कायम हैं। बालकराम ने कहा कि कंपनी कर्मचारियों का शोषण कर रही है।

कर्मचारियों का हो रहा शोषण

EPF के दोनों शेयर कर्मचारियों के वेतन से ही काटे जा रहे हैं। स्वास्थ्य सचिव व निदेशक हमें अपना कर्मचारी मानने तक को तैयार नहीं हैं। ऐसे में सरकार को एस्मा हम पर नहीं बल्कि कंपनी पर लगाया जाना चाहिए।

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क्या बोले एंबुलेंस कर्मचारी?

दूसरी ओर एंबुलेंस कर्मियों का दर्द भी कम नहीं है। वर्षों से सेवा दे रहे ये कर्मचारी वेतन विसंगतियों, न्यूनतम वेतन के अधूरे भुगतान, समय पर सैलरी न मिलने, सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं और सेवा सुरक्षा जैसी मांगों को लेकर खुद को शोषित महसूस कर रहे हैं। यूनियन नेताओं का कहना है कि बार.बार सरकार के समक्ष समस्याएं रखी गईं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।

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काम 12 घंटे, वेतन सिर्फ 8 घंटे का

सीटू अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि NHM के अधीन कार्यरत कर्मचारियों को-

  • न तो न्यूनतम वेतन मिल रहा है और न ही ओवरटाइम का भुगतान।
  • 12-12 घंटे काम करने के बावजूद वेतन 8 घंटे का भी नहीं दिया जाता।
  • हाईकोर्ट, लेबर कोर्ट और CGM कोर्ट शिमला तक के आदेशों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
  • कर्मचारियों के EPF और ESI में गंभीर गड़बड़ियां हैं।
  • वेतन का एक बड़ा हिस्सा कट जाता है।
  • श्रम कानूनों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।
  • जो कर्मचारी अपनी आवाज उठाते हैं, उन्हें तबादलों और मानसिक प्रताड़ना का सामना करना पड़ता है।

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