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January 2, 2026

तारीख पर तारीख... हिमाचल पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट ने दी अगली तारीख, सुक्खू सरकार को मिली राहत !

पूर्व में दिए गए फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं

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Panchayat Elections

शिमला। हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज चुनावों को लेकर चल रहे कानूनी विवाद पर आज हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जिसमें अगली प्रक्रिया को लेकर बड़ा निर्देश सामने आया है। सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव से जुड़े इस संवेदनशील मामले पर अब वही खंडपीठ फैसला सुनेगी, जिसने पूर्व में इसी विषय से जुड़े प्रकरण पर निर्णय दिया था। इसके बाद अदालत ने मामले को 6 जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया है।

चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के आदेश दिए थे

यह सुनवाई अधिवक्ता डिक्कन ठाकुर और अन्य याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर याचिका पर हुई। मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायमूर्ति जियालाल भारद्वाज की खंडपीठ ने की।

 

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सुनवाई के दौरान प्रतिवादी पक्ष ने देवेंद्र नेगी बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले का हवाला दिया, जिसमें पहले ही पंचायत चुनावों और चुनाव नियमों से जुड़े महत्वपूर्ण निर्देश दिए जा चुके हैं। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने कहा कि देवेंद्र नेगी मामले में न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ ने इलेक्शन रूल 9(2) को निरस्त करते हुए चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के आदेश दिए थे।

पूर्व में दिए गए फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि उस फैसले के समय सुप्रीम कोर्ट के किशन सिंह तोमर बनाम स्टेट ऑफ गुजरात मामले के निर्णय को पूरी तरह ध्यान में नहीं लाया गया था। इसी कारण वर्तमान याचिका की सुनवाई उसी खंडपीठ के समक्ष किया जाना न्यायोचित होगा।

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अदालत ने स्पष्ट किया कि वह पूर्व में दिए गए फैसले पर कोई टिप्पणी नहीं कर रही है, बल्कि न्यायिक अनुशासन के तहत मामले को संबंधित खंडपीठ के पास भेजा जा रहा है। इसके बाद आदेश पारित करते हुए कहा गया कि 6 जनवरी को न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति रोमेश वर्मा की खंडपीठ इस मामले पर सुनवाई करेगी।

याचिकाकर्ताओं का आरोप

याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि प्रदेश की सुक्खू सरकार पंचायत चुनावों को जानबूझकर टाल रही है। उनका कहना है कि 31 जनवरी को पंचायतों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, लेकिन अब तक चुनाव प्रक्रिया को लेकर कोई ठोस अधिसूचना जारी नहीं की गई है।

 

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कानून के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल पूरा होने से पहले चुनाव की तैयारी और प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए, लेकिन इस दिशा में देरी की जा रही है। इस मामले में राज्य सरकार और राज्य चुनाव आयोग को पक्षकार बनाया गया है।

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