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March 29, 2025
हिमाचल में पहली बार मुख्य सचिव पर सरकार मेहरबान, रिटायरमेंट से पहले मिली एक्सटेंशन
हिमाचल के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को सेवा विस्तार, 6 महीने पद पर बने रहेंगे
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शिमला। हिमाचल प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से छह महीने का सेवा विस्तार मिला है। पहले उनके 31 मार्च को सेवानिवृत्त होने की संभावना थी, और इसके लिए उन्हें विदाई देने के लिए एक डिनर पार्टी भी आयोजित की गई थी। हालांकि, इसी बीच UPSC से सेवा विस्तार की आधिकारिक चिट्ठी प्राप्त हुई, जिसकी जानकारी खुद प्रबोध सक्सेना ने अपने सहयोगी आईएएस अधिकारियों को दी।
मुख्य सचिव के सेवानिवृत्त होने की स्थिति में हिमाचल प्रदेश की अफसरशाही में बड़े स्तर पर बदलाव की संभावना थी। कई वरिष्ठ अधिकारी मुख्य सचिव पद की दौड़ में शामिल थे, और प्रशासनिक हलकों में नए मुख्य सचिव को लेकर चर्चाएं भी तेज थीं।
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लेकिन अब सेवा विस्तार मिलने के बाद यह साफ हो गया है कि प्रबोध सक्सेना अगले छह महीने तक मुख्य सचिव पद पर बने रहेंगे। UPSC से मिले इस सेवा विस्तार के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार उन्हें मुख्य सचिव के पद पर बनाए रखती है या किसी अन्य जिम्मेदारी के लिए तैनात करती है। हिमाचल प्रदेश के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी मुख्य सचिव को सेवा विस्तार दिया गया है।
प्रबोध सक्सेना के कार्यकाल को छह महीने तक बढ़ाने से उन अधिकारियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है, जो इस पद के लिए कतार में थे। संभावित उम्मीदवारों में संजय गुप्ता, केके पंत और ओंकार शर्मा का नाम शामिल था।
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उनके सेवा विस्तार से अब इन अधिकारियों की पदोन्नति की संभावनाओं को झटका लगा है। इस स्थिति से अफसरशाही के भीतर नाराजगी भी देखी जा रही है, क्योंकि टॉप पोस्ट पर एक्सटेंशन से प्रमोशन चैनल प्रभावित होता है, जिससे कई अधिकारी बिना प्रमोशन के ही सेवानिवृत्त हो जाते हैं।
प्रबोध सक्सेना 1990 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं। उन्हें 31 दिसंबर 2022 को हिमाचल प्रदेश का मुख्य सचिव नियुक्त किया गया था।
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उस समय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने तीन वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों - राम सुभग सिंह, निशा सिंह और संजय गुप्ता - की वरिष्ठता को नजरअंदाज करते हुए उन्हें मुख्य सचिव बनाया था। इससे पहले वह विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर रह चुके हैं और राज्य के नीतिगत निर्णयों में अहम भूमिका निभा चुके हैं।
प्रबोध सक्सेना ने हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के चेयरमैन पद के लिए भी आवेदन किया था। यह पद पांच वर्षों के लिए दिया जाता है, लेकिन मुख्य सचिव के रूप में सेवा विस्तार मिलने के बाद अब इस पद पर उनकी नियुक्ति की संभावनाएं कम हो गई हैं।
सेवा विस्तार मिलने के बाद प्रबोध सक्सेना अब अगले छह महीने तक हिमाचल प्रदेश की अफसरशाही की कमान संभालेंगे। हालांकि, यह राज्य सरकार पर निर्भर करेगा कि वह उन्हें मुख्य सचिव के रूप में बनाए रखती है या किसी अन्य पद पर तैनात करती है। इस फैसले का असर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे और अफसरशाही के कामकाज पर भी पड़ेगा।