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July 31, 2025
हिमाचल: मजदूरों के कमरे में भर गया पानी, दरवाजा खोलते मलबे के साथ आ गिरी युवक की देह
कमरे में सोये थे 7 कश्मीरी मजदूर, अचानक भर गया पानी
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मंडी। हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश के बाद बादल फटने, भूस्खलन और फ्लैश फ्लड ने कई परिवारों की जिंदगी को तबाह कर दिया है। प्राकृतिक आपदा का सबसे अधिक असर मंडी जिला में हुआ है। यहां 30 जून को आई भयानक आपदा के जख्म अभी भरे भी नहीं थे कि 29 जुलाई को एक बार फिर छोटी काशी बादल फटने की घटनाओं से सहम गई।
29 जुलाई मंगलवार की सुबह मंडी शहर के लिए एक काली सुबह बनकर आई। रातभर की भारी बारिश के बाद अचानक आई फ्लैश फ्लड ने पूरे इलाके को तहस-नहस कर दिया। छोटी काशी के नाम से मशहूर मंडी में आई इस प्राकृतिक आपदा ने कई लोगों को बेघर कर दिया, तो कई ऐसे भी रहे जिन्होंने मौत को अपनी आंखों के सामने नाचते देखा। मंडी की जेल रोड, सड्डा मोहल्ला और आसपास के इलाकों में पानी और मलबे ने जनजीवन को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर दिया।
इस भयंकर आपदा की सबसे मार्मिक तस्वीर मंडी की जेल रोड से सामने आई, जहां एक किराए के कमरे में रह रहे सात कश्मीरी मजदूरों ने अपनी जान बचाने के लिए रात के अंधेरे में जिंदगी और मौत के बीच लंबी लड़ाई लड़ी। मजदूरी कर जीवनयापन करने वाले ये मजदूर गुलजार अहमद, शकील अहमद, इरफान, मुश्ताक, फारुख, कुरशीद और शौकत सोते समय जब पानी की आवाज से जगे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
गुलजार अहमद बताते हैं कि सुबह तीन बजे के करीब तेज बारिश हो रही थी। वह और उनके छह मजदूर साथी कमरे में सोये हुए थे। तभी अचानक बाहर पानी का बहाव इतना तेज हो यगा कि यह पानी कमरे में घुस आया। उन्हें इस बात का पता तब चला, जब पानी हमारे ऊपर से गुजरने लगा। सभी लोग पानी को देख कर घबरा गए। जैसे तैसे वह दरवाजे के पास पहुंचे, तो बाहर पानी और मलबे के चलते दरवाजा भी नहीं खुल रहा था। कड़ी मशकत के बाद जब दरवाजा खोला गया तो, एक दम से अंदर पानी के साथ भारी मलबा आ गया और कमरे में चार से पांच फीट तक पानी और मलबा भर गया।
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इससे भी भयानक मंजर उस समय उनके सामने आया, जब कमरे में पानी और मलबे के साथ ही एक युवक की लाश भी उनके कमरे में आ गिरी। यह मंजर देख सभी मजदूर सन्न रह गए। इतना नहीं बाहर का दृश्य इससे भी ज्यादा भयानक था। बाहर पांच फीट तक पानी बह रहा था। लोगों का घरेलू सामान पानी में तिनके की तरह बह रहा था। हर तरफ अफरा तफरी मची हुई थी।
अपनी जान बचाने के लिए सभी मजदूर कमरे की दीवार और ऊंची अलमारियों पर चढ़ गए और सुरक्षित स्थान की ओर निकल पड़े। इस आपदा में उनका सारा जमा किया हुआ सामान, राशन, बर्तन, मोबाइल फोन और मजदूरी की पूंजी बह गई। केवल जान बची, और अब उनके सामने फिर से जीवन को पटरी पर लाने की चुनौती है।
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आपदा के बाद सभी मजदूरों ने मंडी बस स्टैंड पर रात बिताई। एक ढाबे में खाना खाया और सुबह फिर उसी कमरे पर लौटे जहां अब केवल मलबा बचा था। टूटे सामान को इकट्ठा करते हुए उनकी आंखों में डर के साथ.साथ निराशा भी साफ झलक रही थी। हालांकि, जिला प्रशासन ने राहत कार्य तेज करते हुए इन्हें सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कर दिया है और प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
फ्लैश फ्लड ने मंडी के कई परिवारों को जीवनभर के लिए जख्म दे दिए हैं। जेल रोड, सौली खड्ड किनारे और अन्य निचले इलाकों में कई मकान आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। लोगों के घरों में पानी और मलबा भर गया है, जिससे हजारों की संपत्ति का नुकसान हुआ है। जिला प्रशासन और राहत एजेंसियों द्वारा युद्धस्तर पर सफाई और पुनर्वास कार्य जारी है।
डीसी मंडी द्वारा जारी बयान में कहा गया है कि प्रभावितों के लिए अस्थायी शेल्टर होम बनाए गए हैं और राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। साथ हीए नुकसान का आकलन कर उचित मुआवजा भी जल्द जारी किया जाएगा। आपदा प्रबंधन दल लगातार क्षेत्र में काम कर रहा है और लोगों से अपील की गई है कि अफवाहों से बचें और सतर्क रहें।