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December 24, 2025

हिमाचल में पांच दवा उद्योगों पर लटका ताला, सैंकड़ो लोगों की चली गई नौकरी; क्या हैं कारण

सख्त नियमों के चलते हिमाचल के दवा उद्योगों पर लटकने लगे ताले

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Solan Pharma Industries

सोलन। हिमाचल प्रदेश को देश का फार्मा कैपिटल कहा जाता है। यहां बनी दवाएं न सिर्फ भारत, बल्कि अमेरिका, यूरोप, अफ्रीका और एशिया के कई देशों तक पहुंचती हैं। लेकिन अब यही फार्मा हब संकट के दौर से गुजर रहा है। जहां कभी दवा उद्योगों की चिमनियां विकास की कहानी कहती थीं, वहीं अब अचानक लगे ताले चिंता की लकीरें खींच रहे हैं। केंद्र सरकार के सख्त नियमों की मार ऐसी पड़ी कि सोलन में एक ही झटके में पांच दवा उद्योग बंद हो गए, जिससे सैकड़ों परिवारों की रोज़ी.रोटी एक झटके में ही छीन गई है।

सख्त नियमों की मारए सोलन में बंद हुए पांच दवा उद्योग

दरअसल हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में स्थित पांच फार्मास्यूटिकल कंपनियां अचानक बंद हो गई हैं। ये सभी यूनिट्स किराए के भवनों में संचालित हो रही थीं और केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए संशोधित अनुसूची एम (Revised Schedule M) के नए मानकों को पूरा करने में असमर्थ रहीं। उद्योगों के बंद होने से करीब 500 से अधिक मजदूर बेरोजगार हो गए हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी सीधा असर पड़ा है।

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मानकों पर खरा उतरना बना चुनौती

जानकारी के अनुसार बंद हुई सभी दवा इकाइयां किराए के मकानों में चल रही थीं। नए नियमों के तहत आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, उन्नत क्वालिटी सिस्टम और तकनीकी सुविधाओं की जरूरत है, जिसे किराए की इमारतों में पूरा करना आसान नहीं था। हालांकि ये कंपनियां आर्थिक रूप से घाटे में नहीं थीं और मुनाफे में काम कर रही थीं, लेकिन सख्त गुणवत्ता मानकों के चलते इन्हें अपना संचालन बंद करना पड़ा।

संशोधित अनुसूची एम बना बंदी की वजह

इन दवा उद्योगों के बंद होने की मुख्य वजह दिसंबर 2023 में अधिसूचित संशोधित अनुसूची एम है। इस नियम के तहत दवा निर्माण में गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर की गुड मैन्युफैक्चरिंग प्रैक्टिस (GMP) को अनिवार्य किया गया है। केंद्रीय दवा नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने कंपनियों को इन मानकों को पूरा करने के लिए 31 दिसंबर तक का समय दिया था। 1 जनवरी से नियमों का पालन न करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई शुरू होनी थी।

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जांच के आदेश] कार्रवाई के संकेत

ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने राज्य दवा नियंत्रक को निर्देश दिए हैं कि सभी दवा इकाइयों की जांच की जाए, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वे गुणवत्ता और सुरक्षा के वैश्विक मानकों का पालन कर रही हैं। राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर के अनुसार, जो भी उद्योग संशोधित अनुसूची एम के मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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छोटे उद्योगों के लिए खत्म हुआ ग्रेस पीरियड

सरकार के अनुसार, बड़े दवा निर्माताओं के लिए ये नियम 1 जनवरी 2025 से लागू हो चुके हैं, जबकि छोटे और मध्यम फार्मा उद्योगों को एक निश्चित समयसीमा दी गई थी। अब ग्रेस पीरियड समाप्त होने के बाद निरीक्षण और अनुपालन की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। इसी दबाव के चलते कई छोटे उद्योग हिमाचल से अपना कारोबार समेटने लगे हैं।

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नई जीएमपी से होगा दवा उत्पादन

संशोधित अनुसूची एम के तहत अब देशभर में दवाओं का उत्पादन नई जीएमपी गाइडलाइंस के अनुसार किया जाएगा। इसमें फार्मास्यूटिकल क्वालिटी सिस्टम, रिस्क मैनेजमेंट, गुणवत्ता समीक्षा और कंप्यूटरीकृत सिस्टम जैसे आधुनिक पहलुओं को शामिल किया गया है। सरकार का उद्देश्य भारतीय दवाओं को वैश्विक बाजार में और अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और प्रतिस्पर्धी बनाना है।

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