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December 17, 2025
क्या हिमाचल के जंगलों से हटेंगे सूखे चीड़-खैर? CM सुक्खू ने दिया जवाब- बताए नियम
कांग्रेस विधायक के सरकार से सवाल
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शिमला। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों की धड़कन माने जाने वाले चीड़ और खैर के पेड़ों को काटने की अनुमति नहीं दी जाती। हालांकि ये सूखे और कमजोर पेड़ बारिश, आंधी या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान हादसों का कारण बन सकते हैं, फिर भी सुरक्षा और पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए इनके कटान पर सख्त रोक लागू है।
बता दें कि बीते मंगलवार को ऊना विधानसभा क्षेत्र गगरेट में कांग्रेस विधायक राकेश कालिया ने सवाल किया कि प्रदेश में सूखे चीड़ और खैर के पेड़ों की कटाई पर रोक है या नहीं अगर है, तो इसे हटाने का कोई प्लेन है, और अगर नहीं है, तो इसके पीछे का क्या वजह है।
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वहीं इसी सवाल का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने दिया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में हरे और सूखे पेड़ों की कटाई पर फिलहाल सीमित रोक लागू है। यह कदम पर्यावरण और हिमाचली भूगोल को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
⦁ सूखे और हरे खैर के पेड़ों की कटाई दस वर्षीय पातन कार्यक्रम के तहत होती है, यानी यह एक तय योजना और समय के अनुसार ही होती है।
⦁ चीड़ के पेड़ों के लिए नियम ज्यादा सख्त हैं। निजी जमीन पर स्थित चीड़ के पेड़ों को काटना पूरी तरह मना है।
⦁ सरकारी जमीन पर भी यदि चीड़ के पेड़ सूखे या कमजोर हो जाएं, तो उन्हें सीधे नहीं काटा जाता। पहले साल्वेज और सिल्वीकल्चर मार्किंग होती है, उसके बाद पेड़ों को लॉट बनाकर वन विकास निगम को सौंपा जाता है।
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सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल पर्यावरण और भौगोलिक हालात को देखते हुए प्रतिबंध हटाने का कोई विचार नहीं है। बिना नियंत्रण के कटाई से पर्यावरण और पहाड़ी ढांचे को नुकसान पहुंच सकता है। हिमाचल में सूखे चीड़ और खैर के पेड़ों की कटाई पर नियम अभी भी सख्त हैं। सरकार पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हुए तय प्रक्रिया के तहत ही पेड़ों की कटाई की अनुमति दे रही है।