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January 28, 2026

हिमाचल भारी बर्फबारी में भी कम नहीं हुई आस्था : बर्फीले तूफान में देवता संग 12 KM पैदल चले देवलू

\किसी भी देवलू ने थकान या परेशानी की शिकायत नहीं की

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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के बालीचौकी क्षेत्र में प्रकृति का रौद्र रूप भी लोगों की देव आस्था को डिगा नहीं सका। भारी बर्फबारी, तेज बर्फीली हवाएं और जमा होती बर्फ के बीच भी श्रद्धालुओं का विश्वास अडोल रहा।

एक फीट से ज्यादा बर्फ

उपमंडल बालीचौकी के आराध्य देवता श्री चुंजवाला को मंगलवार को देवधार से शिवाड़ी तक करीब 12 किलोमीटर लंबी पैदल देव यात्रा के माध्यम से देउली स्थल पहुंचाया गया। यात्रा के दौरान आसमान से लगातार बर्फ गिरती रही और कई स्थानों पर एक फीट से अधिक बर्फ जम चुकी थी।

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फिर भी नहीं रुकी देव परिक्रमा

रास्ते फिसलन भरे थे, ठंडी हवाएं शरीर को सुन्न कर देने वाली थीं, लेकिन इसके बावजूद देवता के देवलू पूरे श्रद्धा भाव के साथ कदम से कदम मिलाकर चलते रहे। हर कदम पर देव आस्था का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि देवभूमि हिमाचल में भक्ति मौसम की मोहताज नहीं होती।

निजी देउली के लिए की गई यात्रा

जानकारी के अनुसार, शिवाड़ी में देवता श्री चुंजवाला के एक भक्त की निजी देउली स्थित है। इसी धार्मिक परंपरा के तहत देवता को देवधार से शिवाड़ी तक ले जाया गया। खराब मौसम के चलते जहां आम लोग घरों में दुबके रहे और बाहर निकलने से बचते नजर आए, वहीं दर्जनों देवलू पूरी निष्ठा के साथ इस कठिन यात्रा का हिस्सा बने।

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कड़ाके की ठंड, तेज तूफान

हैरानी की बात यह रही कि कड़ाके की ठंड, तेज तूफान और लंबी दूरी के बावजूद किसी भी देवलू ने थकान या परेशानी की शिकायत नहीं की। देवता चुंजवाला के देवलू ओम प्रकाश ने बताया कि यात्रा के दौरान मौसम बेहद खराब था।

 

देव भक्ति में लीन देवलू

कई जगहों पर चलना भी मुश्किल हो रहा था, लेकिन देव भक्ति में लीन होने के कारण किसी को भी ठंड या कठिनाई का अहसास नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि देवता के साथ चलना केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि आस्था का अनुभव होता है। यही वजह है कि हर देवलू ने इसे सौभाग्य समझकर पूरा किया।

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देवभूमि की पहचान है ऐसी अटूट श्रद्धा

स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसी देव यात्राएं हिमाचल की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं का जीवंत उदाहरण हैं। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देवता के प्रति यह अडिग श्रद्धा ही हिमाचल को देवभूमि कहलाने का गौरव देती है। बर्फ से ढके पहाड़ों और सफेद चादर में लिपटे रास्तों के बीच देवता की पालकी के साथ चलते देवलुओं का यह दृश्य क्षेत्र में चर्चा का विषय बना रहा।

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