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January 2, 2026

दिल्ली कर्तव्य पथ पर हिमाचल के शौर्य को बयां करेगी झांकी, हिमाचली टोपी के शिखर पर दिखेंगे वीर सपूत

कर्तव्य पथ पर गूंजेगी हिमाचल के वीर सपूतों की अमर गाथा

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himachal News

शिमला। हिमालय की ऊंचाइयों से निकलकर जब शौर्य की गाथा देश की राजधानी तक पहुंचे, तो वह केवल झांकी नहीं, इतिहास बन जाती है। 26 जनवरी 2026 को गणतंत्र दिवस के अवसर पर दिल्ली के कर्तव्य पथ पर हिमाचल प्रदेश की झांकी इसी इतिहास को रचने जा रही है। इस बार हिमाचल की पहचान संस्कृति या पर्यटन से नहीं, बल्कि वीरता, बलिदान और राष्ट्रभक्ति से होगी, और इसका प्रतीक बनेगी हिमाचली टोपी, जिसके शिखर पर अमर वीर सपूतों की प्रतिमाएं देश को नमन का संदेश देंगी।

पांच साल बाद हिमाचल की दमदार वापसी

लगातार पांच वर्षों तक गणतंत्र दिवस परेड से दूर रहने के बाद हिमाचल प्रदेश की झांकी को वर्ष 2026 के लिए रक्षा मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है। वर्ष 2020 के बाद यह पहली बार होगा जब हिमाचल प्रदेश कर्तव्य पथ पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएगा। इस मंजूरी को प्रदेश के लिए सम्मान और गौरव की बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। मंजूरी मिलने के बाद भाषा एवं संस्कृति विभाग ने झांकी निर्माण की प्रक्रिया शुरू कर दी है। 

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वीरता को समर्पित होगी हिमाचल की झांकी

झांकी का डिजाइन जवाहरलाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय शिमला में सहायक आचार्य अमन नेगी ने तैयार किया है। हिमाचल की झांकी की थीम गैलेंटरी अवार्डीज ऑफ हिमाचल प्रदेश रखी गई है। झांकी पूरी तरह से उन वीर सपूतों को समर्पित होगी, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। संदेश स्पष्ट है सीमांत और पहाड़ी राज्य होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश ने हर युद्ध और हर संकट में राष्ट्र की ढाल बनकर भूमिका निभाई है।

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काठकुणी वास्तुकला और हिमाचली टोपी बनेगी पहचान

झांकी के अग्रभाग में हिमाचल की पारंपरिक काठकुणी वास्तुकला से प्रेरित छत को दर्शाया गया है, जो भूकंपरोधी तकनीक, मजबूती और पहाड़ी जीवन की सहनशीलता का प्रतीक है। इसी छत के ऊपर स्थापित की गई हिमाचली टोपी झांकी की केंद्रीय पहचान होगी। टोपी के शिखर पर हिमाचल प्रदेश के चार परमवीर चक्र विजेताओं की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जो यह दर्शाती हैं कि हिमाचल की भूमि केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है। झांकी के पहले हिस्से में मूर्तिकला और शिल्प के माध्यम से वीरता और युद्धभूमि के साहस को दर्शाया गया है, जबकि दूसरे हिस्से में सभी सम्मानित वीरों के चित्र शामिल किए गए हैं।

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हिमालय पर तिरंगा और सेना को सलामी

झांकी में हिमालय की पृष्ठभूमि में तिरंगा फहराते भारतीय सैनिकों की प्रतिमा देशभक्ति का भाव जगाती है। इसके साथ दो सेना अधिकारी सलामी की मुद्रा में दर्शाए गए हैं, जो देश की रक्षा में समर्पित भारतीय सेना को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

इन वीर सपूतों की गाथा होगी शामिल

झांकी में हिमाचल प्रदेश के गौरव

 

परमवीर चक्र विजेता:

  • मेजर सोमनाथ शर्मा
  • मेजर धन सिंह थापा
  • कैप्टन विक्रम बत्रा
  • राइफलमैन संजय कुमार

अशोक चक्र विजेता:

  • कर्नल जसबीर सिंह रैना
  • कैप्टन सुधीर कुमार

महावीर चक्र विजेता:

  • ब्रिगेडियर रतन नाथ शर्मा
  • ब्रिगेडियर बासुदेव सिंह मनकोटिया
  • कर्नल कमल सिंह
  • मेजर जनरल ए.एस. पठानिया
  • जनरल आर.एस. दयाल
  • सूबेदार मेजर कांशी राम
  • मेजर जनरल के.एस. रतन की वीरगाथाओं को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा।

किसने किया झांकी का डिजाइन

इस ऐतिहासिक झांकी का डिजाइन जवाहरलाल नेहरू राजकीय ललित कला महाविद्यालय, शिमला के सहायक आचार्य अमन नेगी ने तैयार किया है। अमन नेगी मूल रूप से किन्नौर जिले के रूघी गांव से हैं। उन्होंने बताया कि कला के प्रति रुचि उन्हें बचपन से रही और इसमें उनके पिता विमल नेगी की प्रेरणा अहम रही।

 

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कर्तव्य पथ पर हिमाचल की पिछली झलकियां

इससे पहले भी हिमाचल प्रदेश की झांकी कई बार राष्ट्रीय मंच पर प्रदेश की पहचान बन चुकी है—

  • 1993 में पर्यटन और बर्फबारी,
  • 1998 में कुल्लू दशहरा
  • 2007 में लाहौल-स्पीति के मठ
  • 2012 में किन्नौर की जनजातीय संस्कृति
  • 2017 में चंबा रुमाल
  • 2018 में लाहौल-स्पीति की विरासत
  • 2020 में कुल्लू दशहरा की झलक देश ने देखी।

इस बार संस्कृति नहीं, शौर्य देखेगा देश

इस बार हिमाचल की झांकी केवल कला या परंपरा की नहीं, बल्कि बलिदान, वीरता और राष्ट्रभक्ति की कहानी कहेगी। कर्तव्य पथ पर जब हिमाचली टोपी के शिखर से वीर सपूतों की प्रतिमाएं देश को नमन करेंगी, तब हिमाचल का हर नागरिक गर्व से कह सकेगा— “यह देवभूमि नहीं, वीरभूमि है।

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